माथे पर सजने वाली बिंदी से बनी खूबसूरत कलाकृति

 बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 10:06 IST तक के समाचार

माथे पर सजने वाली बिंदी से बनी सुंदर कलाकृति.

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    पारंपरिक तौर पर एक एक ‘बिंदी’ लाल रंग का गोलाकार चिन्ह होता है जिसे महिलाएं अपने माथे पर दोनों भवों के बीच में लगाती हैं. लेकिन कभी-कभी इस जगह को आभूषण से भी सजाया जाता है. ऐसा ही एक उदारहण है गांधी का ये बंदर जिसे कलाकार शेषधर पांडेय ने सांप के आकार की बिंदियों से बनाया है. सभी तस्वीरें स्वाति अर्जुन, बीबीसी संवाददाता.
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    शेषधर पांडेय की कला अपने आप में खास है. कलाकार ने अपनी कला के द्वारा भारत की विशिष्ट और सांस्कृतिक धरोहर को अभिव्यक्ति देने की कोशिश की है. इस तस्वीर में देवी अन्नपूर्णा को दिखाया गया है. भारतीय संदर्भ में अन्नपूर्णा का मतलब होता है अनाज से परिपूर्ण होना. ऐसी मान्यता है कि जिस घर में देवी अन्नपूर्णा निवास करती है उस घर में कोई भूखा नहीं रहता.
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    ये ‘त्रिनेत्र’ है, देवों के देव महादेव की तीसरी आंख. पौराणिक हिंदु मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को सृष्टि का रचयिता और विनाशक दोनों माना जाता है. इस तस्वीर में शिव को क्रोध की मुद्रा में दिखाया गया है, जब वे अपना तीसरा नेत्र या आंख खोलते हैं.
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    अपने विविध कला रुपों के ज़रिए कलाकार ने भारत की बहुरंगी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक इतिहास को दिखाने की कोशिश की है. बिंदी से सजी इस पेंटिंग में शेषधर पांडेय ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को एक सत्याग्रही के रुप में अकेले 1947 के दंगा पीडि़त बिहार की यात्रा करते हुए दिखाया है.
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    ऐसा कहा जाता है कि एक कलाकार अपने कैनवास पर उतनी ही कला उकेर सकता है जितना उसका मन या हृदय महसूस कर सकता है. शेषधर पांडेय पूर्व में भारतीय सेना में फौजी रह चुके हैं और देशभक्ति की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी है. इस तस्वीर में उन्होंनें ‘भारत माता’ को नमन किया है
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    कला की व्याख्या ऐसे भावना के रूप मे की जाती है जो हमारे अंदर उठने वाले विभिन्न भाव-भंगिमाओँ को प्रदर्शित करता है. कई बार हमारे मन में एक साथ कई भाव उठते हैं जिनमें कुछ को हम मान लेते हैं और कुछ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, भावनाओं की इन्हीं लहरों को ‘टाईड’ या लहरों में चित्रित किया गया है.
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    ये 'ओम्' का प्रतीक चिन्ह है. ओम् को भारत में हिंदुओं के पवित्र प्रतीक चिन्ह के रुप में मान्यता मिली हुई है. ओम् को पूरी दुनिया में हिंदुओं का सबसे पवित्र प्रतिरुप माना जाता है. ओम् का प्रयोग मौखिक, शाब्दिक और प्रतीकात्मक तौर पर हर धार्मिक और सांस्कृतिक समारोह में किया जाता है.
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    आतंक का साया. जब भी कोई बुरी ताकत हमारा संहार करने आती है तो हम भयाक्रांत हो जाते हैं, लेकिन ऐसी स्थितियों में अक्सर दुश्मन पर विजयी होने की लड़ाई शुरु हो जाती है.
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    इस तस्वीर में भगवान शिव के प्रतीक चिन्ह शिवलिंग की पूजा करते हुए देवी पार्वती को दिखाया गया है. ऐसी मान्यता है कि शिव को पति रुप में पाने के लिए पार्वती ने कठिन तप कर उन्हें वरदान में पति रुप में पाया था.
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    महात्मा गांधी को पूरी दुनिया में एक मार्गदर्शक के तौर पर भी देखा जाता है. इस तस्वीर में महात्मा गांधी अपने अनुयायियों को ‘स्व-नियंत्रण’ का मंत्र देते हुए दिखाए गए हैं. गांधी जी कहते हैं कि जब भी अपने किसी फैसले को लेकर आप संशय में हो तो खुद से ये पूछें कि आपके इस कदम का उस इंसान को कितना फायदा होगा...जो आपकी नज़र में सबसे गरीब इंसान है..इसका जवाब आपका मार्गदर्शन करेगा.
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    हम जो भी काम करते हैं वो हमारे सोचने की क्षमता या हमारी सोच की दिशा के द्वारा संचालित होती है. हमारी सोच ही हमारे कर्तव्यों को नियंत्रित करती है. बिंदी के सुंदर प्रयोग से मस्तिष्क के भीतर चलने वाली सोच का खूबसूरत चित्रण.
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    नोएडा स्थित अपने घर में कलाकृति बनाने में मशगूल कलाकार शेषधर पांडेय.
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    माथे के बीचों-बीच लगाई जाने वाली बिंदी से हमें उर्जा मिलती है और हमारी एकाग्रता भी मज़बूत होती है. बिंदी मनुष्य के तीसरे नेत्र यानि हमारी आंतरिक शक्ति का भी परिचायक है जो हमें हर तरह के अपशकुनों से बचाता है. हालांकि पारंपरिक तौर पर इसका रंग लाल होता है लेकिन अब इसे विविध रंगों और डिज़ायन में लगाया जाता है.
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    आज भारत ही नहीं पूरे दक्षिण एशिया में बिंदी का प्रयोग किया जाता है, खासकर श्रीलंका, नेपाल, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तानी महिलाओं इसका खूब इस्तेमाल करती हैं. कही-कहीं तो उम्र, शादीशुदा या गैर शादीशुदा होना, धार्मिक और नस्लीय पृष्टभूमि का भी इसके प्रयोग पर कोई फर्क नहीं पड़ता और लोग बगैर किसी हिचकिचाहट के इसका प्रयोग करते हैं.

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