बस एक बूंद पानी की दरकार

 रविवार, 21 अक्तूबर, 2012 को 09:41 IST तक के समाचार
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    महाराष्ट्र के क़रीब 10 हज़ार गांव सूखे की चपेट में है. इतना भयानक सूखा 1972 में भी नहीं पड़ा था जिसे महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़ा सूखा माना जाता है. ठाणे, विदर्भ और सतारा क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. सभी तस्वीरें ऑर्को दत्ता
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    खेत-खलिहान क्या यहां तो कुओं ने भी पानी देने से जैसे इनकार कर दिया है. पानी के बिना लोगों का बुरा हाल है.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    चारों तरफ़ हताशा और निराशा व्याप्त है. एक बूंद पानी के लिए एक किसान गढ्ढे में बैठ गया. शायद पानी मिल जाए इस आस में.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    भयानक सूखे की वजह से लोग दम तोड़ रहे हैं. ऐसे में इन लोगों तक किसी भी तरह से पानी पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    महिलाएं सुबह उठकर पानी की तलाश में निकल जाती हैं. कई बार मीलों दूरी तय करने के बाद पानी मिल जाता है, लेकिन कई बार वो भी नदारद और ख़ाली घड़ा लौटना पड़ता है.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    सुदूर जंगल में एक कुआं दिखा है. पहाड़ों के बीचोबीच है. लेकिन फ़र्क़ क्या पड़ता है पानी तो हर हाल में चाहिए ही.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    दूर तलक सिर्फ़ सूखा, सूखा और सूखा. किसानों को अपने खेत में आशा की एक किरण भी नहीं दिखती. महाराष्ट्र के हजारों गांव का यही हाल है.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे, प्रदूषण
    ज़्यादातर तालाबों का हाल भी बुरा है. अगर कहीं पानी है भी तो प्रदूषण रहित नहीं.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे, पलायन
    पानी ही नहीं तो जीवन क्या. पानी के बिना महाराष्ट्र के कई गांवों से लोग पलायन कर रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि सरकार के पास इनके लिए कोई ख़ास उपाय भी नहीं है.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    एक ग़ैर-सरकारी संस्था 'मान देशी फ़ाउंडेशन' ने मवेशियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए कैंप लगाए हैं.
  • सूखा, महाराष्ट्र, ठाणे
    महाराष्ट्र सूखे से ग्रसित है लेकिन इस तरफ़ किसी की नज़र नहीं पड़ती. ये क्षेत्र मीडिया की नज़रों में भी उपेक्षित है.

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