1962: जब चीन भारत पर भारी पड़ा

 गुरुवार, 18 अक्तूबर, 2012 को 11:16 IST तक के समाचार
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    लद्दाख में मशहूर पेंगगांग झील के किनारे गश्त लगाते भारतीय सैनिक. (तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    लद्दाख में चुशुल के पहाड़ी इलाक़े में पुराने ज़माने की भारी .303 ली इनफ़ील्ड राइफल के साथ निगरानी करते भारतीय सैनिक. (तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    नेफा की सीमा पर बंकर के बाहर इलाक़े का जायजा लेते सैनिक. (तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    सिक्किम में संचार लाइनों की रखवाली करता भारतीय सैनिक .(तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    लद्दाख में 25 पाउंड की फील्ड होवित्जर को गोलाबारी के लिए तैयारी करता एक सिख सैनिक. (तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    अरुणाचल प्रदेश में सेला पास पर पीछे छोड़े गए हथियारों को दोबारा वापस लाने का अभियान शुरू किया गया था. (तस्वीर: सुदीप चौधरी, भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    अरुणाचल प्रदेश में लड़ाई समाप्ति के बाद सेला पास की तस्वीर. इसमें ये पता नहीं चल पा रहा है कि चीनी सैनिक कहाँ हैं. (तस्वीर: सुदीप चौधरी, भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    युद्ध के बाद भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल जेएन चौधरी और एयर वाइस मार्शल मीनू इंजीनियर सीमा के नज़दीक स्थित तेज़पुर के दौरे पर.(तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    नेफा की सीमा पर हथियारों की खेंप गिराता भारतीय वायु सेना का डकोटा विमान.(तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)
  • भारत-चीन युद्ध 1962
    भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने तवांग हेलिपैड पर स्थानीय क़बायली प्रमुखों को सुरक्षित पहुँचाया. (तस्वीर: भारतरक्षक डॉट कॉम से साभार)

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