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लड़कियों की मुश्किलों का अंदाज़ा भी है?

एक लड़की जब बाहर की ज़िंदगी में क़दम रखती है तो उसकी यात्रा उसे कहाँ ले जाती है?

क्या उसे भी वही अवसर मिलते हैं जो उसके साथ बड़े हुए लड़कों को मिले हैं?

क्या उसके सामने भी वैसी ही चुनौतियाँ होंगी?

महिलाओं को मत देने का अधिकार मिले 100 साल से भी अधिक समय हो चुका है, पर अभी भी कई समाजों में वे अभी भी पुरूषों के दबदबे में रहती हैं.

दुनिया में लाखों लड़कियाँ अभी भी स्कूल नहीं जा पातीं, और माँ बन जाती हैं जबकि पश्चिमी देशों में उन्हीं की उम्र की लड़कियाँ शिक्षा और करियर के सपने बुनती हैं.

फिर भी महिलाओं के लिए आज की दुनिया पहले से काफ़ी बेहतर है. मातृत्व संबंधी स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर हो रही हैं. शिक्षा भी सुगम हो रही है. वेतन बढ़ रहे हैं और महिलाएँ अब नीति-निर्धारकों में शामिल हो गई हैं.