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कबीर कला मंच की 'राजनीति' क्या?

वे डफली बजाते हैं, गीत गाते हैं, नाटक करते हैं. वे दलित उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते हैं. वे कबीर कला मंच के कलाकार हैं.

महाराष्ट्र में सांस्कृतिक समूह और दलितों के बीच अपने जनवादी गीतों के जरिए लोकप्रिय होने वाले कबीर कला मंच के कलाकारों पर पिछले दिनों माओवादी होने के आरोप लगे.

कबीर कला मंच के दीपक को महाराष्ट्र सरकार ने माओवादी बता कर दो साल जेल में रखा. वे बताते हैं कि वे माओवादी नहीं हैं. वे बस कला के जरिए सच बोलना चाहते हैं.

उन्होंने बताया कि जनता को शोषित करने वाले मुद्दों, भ्रष्टाचार, जातिवाद जैसे मसलों पर कबीर कला मंच गीतों के जरिए अपनी आवाज उठाता रहा है.

दीपक बताते हैं कि कबीर कला मंच जनता की भाषा में गाने लिखकर, नाटक बनाकर लोगों की राजनीतिक चेतना को आगे बढ़ाना चाहता है. स्वतंत्र मत रखने वाले कबीर कला मंच ने 'छह बाई आठ का घर, उसके सामने गटर, ऐसा क्यूं है..." जैसे गीतों के जरिए जनता के सवालों को आगे रखा है.

दिल्ली में बस में बलात्कार के बाद पुरुषों के ख़िलाफ़ मांगें उठीं, मगर कबीर कला मंच मानता है कि उस सोच और सिस्टम को फांसी दी जानी चाहिए जो पुरुषों की मानसिकता में घुसी है.

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