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'विकास से कोसों दूर'

  • 5 अप्रैल 2014

पिछले एक दशक से भी ज़्यादा समय से सरकार और माओवादियों के बीच जंग का मैदान बन चुके नक्सल प्रभावित इलाकों में क्या सोचते हैं लोग चुनावी मुद्दों के बारे में?

देश भर के अलग-अलग इलाकों में आदिवासी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों तरसते हैं. आखिर राजनीतिक दल उनके मुद्दों को चुनाव में ज़ोर-शोर से क्यों नहीं उठाते?

क्या है वजह उनके प्रति समाज की बेरुखी की.

आदिवासियों के हित और उनके प्रति सामाजिक नज़रिया जैसे मुद्दों पर उनकी क्या राय है? इसी मुद्दों पर इंडिया बोल में बहस. बहस में श्रोताओं के साथ साथ शामिल थे बीबीसी संवाददाता सलमाना रावी और आदिवासी मामलों के जानकार बीके मनीष.