बस्तर के बेनाम भी, बेदखल भी

बस्तर से उजड़े सैकड़ों आदिवासी परिवार आंध्र प्रदेश पहुंचे इस उम्मीद के साथ कि शायद वहां उनकी ज़िंदगी संवर जाएगी. शायद वो अपने बच्चों को पढ़ा पाएंगे, शायद वो कम से वह स्टेटस तो हासिल कर पाएंगे जो उन्हें अपने मूल राज्य यानी छत्तीसगढ़ में हासिल था यानी आदिवासी का दर्जा. मगर नक्सलियों और पुलिस के सताए इन आदिवासियों की सुध न तो आंध्र प्रदेश सरकार ने ली और न छत्तीसगढ़ उन्हें अपनाने को तैयार दिखता है. शायद इसलिए कि क़तार के आख़िरी ये लोग किसी का वोट नहीं हैं.