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नाबालिग अपराधियों के कानून में बदलाव कितना सही?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्लिक करें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव को मंजूरी दे दी है.

मौजूदा क़ानून के तहत 18 साल से कम उम्र के अभियुक्त का मुक़दमा सामान्य अदालत की जगह जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता है और दोषी पाए जाने पर उसे अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए किशोर सुधार घर भेजा जाता है.

इतने बर्बर ग़ुनाह की सज़ा मात्र तीन साल: पीड़िता की मांदिल्ली गैंगरेपः 'नाबालिग' अभियुक्त दोषी क़रारकम नहीं होगी किशोर अपराधियों की आयु सीमा

अब संगीन जुर्म के मामले में सरकार इस क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव संसद में लाने वाली है.

साथ ही प्रस्ताव में ये भी प्रावधान डाला गया है कि अगर 16 साल से ऊपर का नाबालिग कोई संगीन अपराध करता है, तो जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ये तय करेगा कि नाबालिग अभियुक्तों के ख़िलाफ़ नियमित अदालत में मुक़दमा चले या नहीं.

इंडिया बोल में सवाल ये था कि संगीन जुर्म के मामले में जुवेनाइल क़ानून में संशोधन की कोशिश कितनी जायज़ है? क्या नाबालिग अपराधियों को बेहतर इंसान बनने का मौका दोबारा नहीं मिलना चाहिए.

साथ ही सवाल ये भी है कि किशोरों को अपराधी बनाने के पीछे समाज कितना ज़िम्मेदार है. इस कार्यक्रम में शामिल हुए श्रोता, वकील अनंत अस्थाना, महिला कार्यकर्ता रंजना कुमारी और भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमणयम स्वामी