स्वास्तिक की तलाश में जर्मनी पहुंचे गणेश !

  • 29 अगस्त 2014
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जर्मनी के वायमार में 'गणेश वर्सस द थर्ड रीख' नाटक के रिहर्सल के दौरान कलाकार ब्रायन टिली गणेश की वेशभूषा में मंच पर पेश हुए. उनके साथ मंच पर थे सायमन लाहर्टी.

वायमार में आर्ट फ़ेस्टिवल चल रहा है जिसके दौरान इस नाटक का मंचन किया गया. इधर भारत में शुक्रवार से गणेशोत्सव की शुरुआत हुई है.

इस तस्वीर में ऑस्ट्रेलियाई कलाकार ल्यूक रयान नाटक के एक सीन में दिखाई दे रहे हैं.

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इस नाटक के मंचन के दौरान यह कहानी गणेश द्वारा नाज़ी जर्मनी की सैर से शुरू होती है.

महत्वपूर्ण है कि इस नाटक में गणेश हिंदू प्रतीक स्वास्तिक को फिर से हासिल करना चाहते हैं. यह निडर हीरो नाटक के दौरान अपनी यात्रा शुरू करता है और लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करता है.

1933 से 1945 के बीच एडॉल्फ़ हिटलर का काल तीसरे रीख के नाम से जाना जाता है. इस दौरान नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी के हाथ में देश का नियंत्रण था. इसी पार्टी को नाज़ी पार्टी भी कहा जाता है.

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इस नाटक में विघ्नों को दूर करने वाले गणेश को आधार बनाकर कई सवाल उठाए गए हैं.

यह दुनिया को बनाने और बिगाड़ने में इंसान की भागीदारी, इंसान की संभावना और उम्मीदों से जुड़ी कहानी है.

'गणेश वर्सस द थर्ड रीख' के डायरेक्टर ब्रूस ग्लैडविन हैं.

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