रामपाल का 'सिंहासन,' स्टेडियम सा हॉल..

रामपाल सतलोक आश्रम इमेज कॉपीरइट gurpreet singh hindustan times

हरियाणा में बरवाला का सतलोक आश्रम हाल में पुलिस और रामपाल के हज़ारों समर्थकों के संघर्ष का केंद्र बना.

कई दिनों के संघर्ष के बाद अंततः रामपाल को बुधवार की रात गिरफ्तार कर लिया गया. वे 28 नवंबर तक पुलिस हिरासत में रहेंगे.

रामपाल साल 2006 में हुई एक हत्या के मामले में अभियुक्त हैं और उन पर अदालत की अवमानना का भी आरोप है.

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12 एकड़ की भूमि पर बना सतलोक आश्रम किसी भव्य किले जैसा नज़र आता है.

पॉलीथिन बैग, फटे-पुराने कपड़े, कागज़, स्टील के बर्तन और जूते जैसी रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान आश्रम की जमीन पर यहां वहां बिखरे पड़े हैं और यहां हुई हिंसा की गवाही देते हैं.

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रामपाल समर्थक आश्रम में भारत के दूर-दराज इलाकों से आते हैं.

रामपाल जिस जगह अपने अनुयायियों को उपदेश दिया करते थे वह एक विशालकाय तंबु-नुमा हॉल है. पत्रकारों का कहना है कि इस हॉल का आकार फुटबॉल के दो मैदानों जितना है.

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हॉल में लोहे के विशाल खंभे और छत पर सैकडों पंखे लगे हुए हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि रामपाल को गिरफ्तार होने से बचाने के लिए हज़ारों समर्थकों को आश्रम के भीतर जबरन रोक कर रखा गया था.

गुरुवार की शाम तक तकरीबन 20,000 समर्थकों को आश्रम से निकाला गया.

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पुलिस का आरोप है कि रामपाल के हथियारबंद समर्थकों ने आश्रम में कई लोगों को बंधक बनाकर रखा हुआ था. रामपाल के इस 'समर्थक कवच' में महिलाएं और बच्चे शामिल थे.

पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में क़रीब 100 समर्थक घायल हुए जबकि पुलिस ने आश्रम के भीतर से चार महिलाओं और एक बच्चे का शव बरामद किया. हालांकि इन मौत के कारणों के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक रामपाल कांच से घिरे चेंबर में जिस कुर्सी पर बैठकर अपने अनुयायियों को उपदेश दिया करते थे वह लोगों के बीच 'सिंहासन' के रूप में लोकप्रिय था.

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पुलिस ने टेलीग्राफ अखबार को बताया कि वह 'सिंहासन' लिफ़्ट की मदद से तहखाने से ऊपर की मंजिलों पर आती जाती थी. रामपाल की कुर्सी का यूं ऊपर-नीचे आना जाना उनके समर्थकों के बीच रामपाल की तिलस्मी छवि बनाता था जिसके कारण वे उन्हें जादुई शख्सियत मानते थे.

रिपोर्ट के अनुसार रामपाल आश्रम के भीतर निजी बंगले में ठाट-बाट से रहते थे. इस बंगले में न केवल लिफ़्ट बल्कि स्विमिंग पूल की सुविधा भी मौजूद है.

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हत्या और देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के आरोपों से घिरे 63 वर्षीय रामपाल ने आश्रम के भीतर हुई मौतों पर अफ़सोस जताया है.

लेकिन रामपाल ने पुलिस के इस आरोप से इंकार किया है कि उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए समर्थकों को कवच के रूप में इस्तेमाल किया.

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