'मेक इन इंडिया' से चीन की होड़

  • 25 नवंबर 2014
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चीन के सरकारी अख़बार ने भारत के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम की खिल्ली उड़ाई है और निवेशकों को दक्षिण एशियाई देश के "ख़राब बुनियादी ढांचे" से आगाह किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को एक वैश्विक उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश में जुटे हैं. इसी को ध्यान में रख कर सितंबर महीने में उन्होंने 'मेक इन इंडिया' अभियान की शुरुआत की. विश्लेषकों का मानना है कि चीन प्रधानमंत्री मोदी के इस अभियान को मुक़ाबले के रूप में देख रहा है.

कुछ चीनी अख़बारों ने भारत के आर्थिक विकास पर संदेह जाहिर किया है. प्रधानमंत्री मोदी के अभियान की आलोचना कहते हुए पीपुल्स डेली ने एक लेख छापा है.

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लेख में हैरानी जताई गई है कि भारत अपने 'पिछड़े बुनियादी ढांचे' के दम पर कैसे 'वैश्विक कारख़ाना' बन सकता है.

लेख में कहा गया है, "भारत वैश्विक दफ़्तर के रूप में जाना जाता है. वे ज़रूर असहाय हैं क्योंकि वे इसे बदल कर ख़ुद को वैश्विक कारख़ाना बनाना चाहते हैं."

अख़बार ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि साल 2013 में दुनिया के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 'केवल 1.7 फ़ीसदी रही जो चीन के 11 फ़ीसदी से काफ़ी कम है.'

अंग्रेज़ी बोलना भारत के फ़ायदे में

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इसके साथ ही कहा गया है कि भारत का आउटसोर्सिंग कारोबार देश की 'ग़रीबी मिटाने में बहुत कम कारगर हुआ है.'

अख़बार ने यह माना है कि भारत के पास अपने उत्पादन क्षेत्र को विकसित करने के लिए 'अच्छा आधार और क्षमता है.'

अख़बार ने 'अंग्रेज़ी भाषा के ज़्यादा इस्तेमाल के साथ ही अमरीका और यूरोप के मन में भारत के लिए कम संदेह' को इसकी वजह माना है.

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अख़बार ने निवेशकों को इस दक्षिण एशियाई देश में व्यापार करने की क़ीमतों की याद दिलाई है.

इसमें लिखा गया है, "भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर का केवल एक हाईवे है...इन्हें शहर में मेट्रो बनाने में सात साल लग गए. आप रातों रात निवेश का माहौल नहीं बदल सकते...अंग्रेज़ी बोलने वाली आबादी कुलीन लोगों में सिमटी है, और स्नातक लोग की तादाद दो करोड़ से कम है."

अख़बार ने प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी यात्रा की ओर भी ध्यान दिलाया है.

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने कुछ विश्लेषकों से बात की है.

चायनीज़ एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेज़ के प्रोफ़ेसर हुआंग वाइ ने कहा है, "चीन ने दुनिया भर के देशों के साथ समझौते कर एक नया लोकतांत्रिक चेहरा दिखाया है. शी के सरकारी दौरे से यह साबित हुआ है कि चीन न सिर्फ़ बड़े देशों बल्कि छोटे देशों के साथ भी संबंध विकसित कर रहा है."

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