पाकिस्तान से लौटते भारतीय पायलट
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'द ग्रेट इंडियन स्केप'

हाल ही में विंग कमांडर धीरेंद्र एस जाफ़ा की पुस्तक प्रकाशित हुई है 'डेथ वाज़ंट पेनफ़ुल' जिसमें उन्होंने 1971 के युद्ध के बाद भारतीय पायलटों की पाकिस्तानी युद्धबंदी कैंप से निकल भागने की अद्भुत कहानी बताई है.

जब फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट दिलीप पारुलकर का एसयू-7 युद्धक विमान, 10, दिसंबर, 1971 को मार गिराया गया तो उन्होंने इस दुर्घटना को अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुहिम बना दिया.

13 अगस्त, 1972 को पारुलकर, मलविंदर सिंह गरेवाल और हरिश सिंह जी के साथ रावलपिंडी के युद्धबंदी कैम्प से भाग निकले.

इस पुस्तक में बताया गया है कि किस तरह अलग अलग रैंक के 12 भारतीय पायलटों ने एकांतवास, जेल जीवन की अनिश्चतताओं और कठिनाइयों का दिलेरी से सामना किया और इन तीनों पायलटों को जेल ने निकल भागने की दुस्साहसी योजना में मदद की.

सुनिए पूरी कहानी रेहान फ़ज़ल की जुबानी.