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सूफ़ियाना दिल्ली

  • 30 दिसंबर 2015

शायर मीर तक़ी मीर ने किसी ज़माने में दिल्ली पर अफ़सोस जताते हुए कहा था कि हम रहने वाले हैं उसी उजड़े दयार के. पर साहब, दिल्ली शहर हमेशा उजड़ा दयार नहीं था.

किसी ज़माने में सूफ़ी संत और विद्वान दूर देस तुर्की और फ़ारस से चल कर हिंदुस्तान के इस दिल तक पहुँचे और यहीं के होकर रह गए.

राना सफ़वी दिल्ली की रहने वाली इतिहासकार और लेखिका हैं जिन्होंने इस शहर के उन कोनों पर रोशनी डाली है जो आम तौर पर रौशन नहीं होते.

वर्षांत कार्यक्रमों के सिलसिले में राना सफ़वी के साथ उस दिल्ली की सैर ..... जो सूफ़ियों की है.

प्रस्तुतकर्ता - मोहन लाल शर्मा