कैलीग्राफ़ी
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हुनर है, काम नहीं

दिल्ली के कैलीग्राफ़र अब्दुल रहमान के पास हुनर तो है, लेकिन काम नहीं.

कभी वो रोज़ाना हज़ारों रुपए कमा लेते थे, लेकिन अब उनके पास बस इक्का-दुक्का ग्राहक ही आते हैं.

किताबें लिखने का काम ख़त्म हो चुका है. बस शौक़ीन ही कार्ड लिखवाने आते हैं. देखिए वीडियो.

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