इकबाल बानो
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हम देखेंगे, लाज़िम है कि हम भी देखेंगे

ग़ज़ल की विधा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय अगर बेगम अख़्तर के बाद किसी को दिया जा सकता है तो वो हैं इकबाल बानो.

दुनिया भर के ग़ज़ल प्रेमियों को अभी तक याद है जब उन्होंने फ़ैज़ की रचना ‘हम देखेंगे, लाज़िम है कि हम भी देखेंगे’ गाई थी और 50 हज़ार लोगों ने खड़े होकर न सिर्फ़ उन्हें दाद दी थी बल्कि उनके सुर में सुर भी मिलाया था.

इकबाल बानो की सातवीं पुण्य तिथि पर उन्हें याद कर रहे हैं रेहान फ़ज़ल विवेचना में.