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नेपाल- एक परिचय
 
नेपाल
हिमालय की गोद में बसा नेपाल अपनी प्राचीन संस्कृति के लिए जाना जाता है.

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट यहाँ है और अपनी प्राकृतिक संदुरता की वजह से यह पर्यटकों की पसंदीदा जगह है.

हिंदू और बौद्ध संस्कृतियों का अनूठा संगम भी नेपाल में दिखाई देता है.

पर नेपाल दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक है. वहाँ लंबे अंतराल के बाद महाराज बीरेंद्र के शासनकाल में 1990 में बहुदलीय लोकतांत्रिक प्रणाली की शुरूआत हुई.

एक नज़र

नेपाल का इतिहास बताता है कि वहाँ शुरू से ही राजवंशों की परंपरा रही है और आम तौर पर यह देश बाक़ी दुनिया से कटा रहा है.

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • आबादी: 2 करोड़ 40 लाख
  • राजधानी: काठमांडू
  • मुख्य भाषा: नेपाली
  • धर्म: हिंदू, बौद्ध
  • शासनतंत्र: संसदीय लोकतंत्र और सांविधानिक राजशाही
  • मुद्रा: नेपाली रुपया
  • मुख्य निर्यात: कालीन, कपड़े, चमड़े के सामान, जूट, अनाज
  • इंटरनेट डोमेन: .np
  • समय: जीएमटी से 5.75 घंटे आगे
  • अंतरराष्ट्रीय कोड: +977

1959 में बहुदलीय लोकतंत्र का प्रयास नाकाम हो गया जब महाराज महेंद्र ने संसद को भंग कर के सारे अधिकार अपने पास रख लिए.

1990 में भारी जन-विरोध के बाद बहुदलीय लोकतंत्र की दोबारा शुरूआत हुई लेकिन तब से लेकर आज तक सारे राजनीतिक दल खेमों में बंटे रहे हैं और देश में भारी राजनीतिक अस्थिरता रही है.

नेपाल की एक और बड़ी समस्या है वहाँ चल रहा हिंसक माओवादी आंदोलन. अब तक लगभग 2500 लोग इस हिंसा का शिकार हो चुके हैं.

दूसरी समस्या है पड़ोसी देश भूटान से शरणार्थियों का बड़ी संख्या में आना.

नेपाल कई तरह के पर्यावरण संकटों से भी जूझ रहा है. वनों की अंधाधुंध कटाई, अतिक्रमण और राजधानी काठमांडू में भीषण वाहनजनित प्रदूषण कुछ बड़ी समस्याएं हैं.

नेपाल की ज़्यादातर आबादी खेती पर निर्भर है और देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या ग़रीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करती है.

देश की अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक विदेशी सहायता पर निर्भर करती है. भारत के साथ होने वाला व्यापार और पर्यटन भी नेपाल की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान करते हैं.

नेता

राष्ट्राध्यक्ष: महाराज ज्ञानेंद्र बीर बिक्रमनाथ शाहदेव

महाराज ज्ञानेंद्र का जन्म 1947 में हुआ था, वे दिवंगत महाराज बीरेंद्र के छोटे भाई हैं. महाराज बीरेंद्र और राजपरिवार के कई अन्य सदस्य की 1 जून 2001 को हत्या कर दी गई थी. महाराज बीरेंद्र के बड़े बेटे युवराज दीपेंद्र को इन हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार माना गया.

महाराज ज्ञानेंद्र: प्रभावशाली राजा
4 जून 2001 को युवराज दीपेंद्र के निधन के बाद महाराज ज्ञानेंद्र नेपाल नरेश बने.

महाराज ज्ञानेंद्र की कार्यशैली को दिंवगत महाराज बीरेंद्र की तुलना में अधिक प्रभावशाली माना जाता है. उनके बारे में माना जाता है कि नेपाल उनके नेतृत्व में सुरक्षित है और वे जल्द से जल्द राजशाही को दोबारा मज़बूत करना चाहते हैं.

भारत और नेपाल में पढ़े ज्ञानेंद्र को उनके पर्यावरण संरक्षण के कामों के लिए जाना जाता है. वे देश में पर्यटन को और बढ़ावा देना चाहते हैं, वे काठमांडू के एक होटल के मालिक भी रहे हैं.

महाराज ज्ञानेंद्र की दो संताने हैं. उनके छोटे बेटे पारस की जीवनशैली हमेशा विवादों के घेरे में रही है.

समाचार माध्यम

नेपाल में राजपरिवार और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर समाचार प्रकाशित करने पर कड़ा नियंत्रण है. कई बार पुलिस की ज़्यादतियों और भ्रष्टाचार की ख़बरें देने के लिए पत्रकारों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

फिर भी यह माना जाता है कि नेपाल में पत्रकारों को पर्याप्त स्वतंत्रता है. कई ऐसे प्रकाशन हैं जो सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं.

जनवरी 2001 में प्राइवेट एफ़एम चैनलों को समाचार प्रसारित करने से रोक दिया गया था लेकिन इस निर्णय को अदालत में चुनौती दी गई है.

नेपाल में रेडियो प्रसारण 1951 में शुरू हुआ और टेलीविज़न 1986 में. देश में सिर्फ़ 10 प्रतिशत तक टेलीविज़न पहुंच पाया है जबकि केवल 14 प्रतिशत लोगों तक ही बिजली पहुंची है.

मुख्य समाचारपत्र
काठमांडू पोस्ट
राइजिंग नेपाल
गोरखापत्र
नेपाली हिंदी दैनिक
कांतिपुर टाइम्स

टेलीविज़न
नेपाली टीवी कॉर्पोरेशन- एनटीवी

रेडियो
रेडियो नेपाल - सरकारी
हिट्स एफ़एम - व्यावसायिक
हिमालयन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन
रेडियो सागरमाथा- व्यावसायिक
रेडियो कांतिपुर- एफ़एम, व्यावसायिक
इमेज चैनल- एफ़एम, व्यावसायिक
म्युज़िक चैनल - एफ़एम, व्यावसायिक
क्लासिक - एफ़एम, व्यावसायिक
गुडनाइट - एफ़एम, व्यावसायिक

समाचार एजेंसी
राष्ट्रीय समाचार समिति- सरकारी

 
 
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