BBC World Service LogoHOMEPAGE | NEWS | SPORT | WORLD SERVICE DOWNLOAD FONT | Problem viewing?
BBCHindi.com

पहला पन्ना
भारत और पड़ोस
खेल और खिलाड़ी
कारोबार
विज्ञान
आपकी राय
विस्तार से पढ़िए
हमारे कार्यक्रम
प्रसारण समय
समाचार 
समीक्षाएं 
आजकल 
हमारे बारे में
हमारा पता
वेबगाइड
मदद चाहिए?
Sourh Asia News
BBC Urdu
BBC Bengali
BBC Nepali
BBC Tamil
 
BBC News
 
BBC Weather
 
 आप यहां हैं: 
 ताज़ा समाचार
बुधवार, 04 सितंबर, 2002 को 14:00 GMT तक के समाचार
कावेरी विवाद आख़िर है क्या?
कावेरी विवाद तमिल नाडु से कर्नाटक तक फैला हुआ है
कावेरी विवाद तमिल नाडु से कर्नाटक तक फैला हुआ है

कावेरी विवाद

भारतीय संविधान के मुताबिक कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है.

कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़नेवाले प्रमुख राज्य हैं. इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है.

और समुद्र में मिलने से पहले ये नदी कराइकाल से होकर गुजरती है जो पांडिचेरी का हिस्सा है.

इस नदी के जल के बँटवारे को लेकर इन चारों राज्यों में विवाद का एक लम्बा इतिहास है.

विवाद का इतिहास

कावेरी नदी के बँटवारे को लेकर चल रहा विवाद 19वीं शताब्दी में शुरू हुआ. उस वक्त ब्रिटिश राज के तहत ये विवाद मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर राज के बीच था.

1924 में इन दोनों के बीच एक समझौता हुआ. लेकिन बाद में इस विवाद में केरल और पांडिचारी भी शामिल हो गए. और यह विवाद और जटिल हो गया.

भारत सरकार द्वारा 1972 में बनाई गई एक कमेटी की रिपोर्ट और विशेषज्ञों की सिफ़ारिशों के बाद अगस्त 1976 में कावेरी जल विवाद के सभी चार दावेदारों के बीच एक समझौता हुआ.

इस समझौते की घोषणा संसद में भी की गई. लेकिन इस समझौते का पालन नहीं हुआ और ये विवाद चलता रहा.

इस बीच जुलाई 1986 में तमिल नाडु ने अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम(1956) के तहत इस मामले को सुलझाने के लिए आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार से एक न्यायाधिकरण के गठन किए जाने का निवेदन किया.

केंद्र सरकार फिर भी इस विवाद का हल बातचीत के ज़रिए ही निकाले जाने के पक्ष में रही.

इस बीच तमिल नाडु के कुछ किसानों की याचिका की सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मामले में न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया.

केंद्र सरकार ने 2 जून 1990 को न्यायाधिकरण का गठन किया. और अबतक इस विवाद को सुलझाने की कोशिश चल रही है.

अंतरिम आदेश

इस बीच न्यायाधिकरण के एक अंतरिम आदेश ने मामले को और जटिल बना दिया है.

1991 में न्यायाधिकरण ने एक अंतरिम आदेश पारित किया जिसमें कहा गया था कि कर्नाटक कावेरी जल का एक तय हिस्सा तमिल नाडु को देगा. हर महीने कितना पानी छोड़ा जाएगा, ये भी तय किया गया. लेकिन इसपर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ.

इस बीच तमिलनाडु इस अंतरिम आदेश को लागू करने के लिए ज़ोर देने लगा. इस आदेश को लागू करने के लिए एक याचिका भी उसने उच्चतम न्यायालय में दाखिल की. पर इस सबसे मामला और पेचीदा ही होता गया.

समाधान से परहेज़

इस विवाद पर कर्नाटक और तमिलनाडु, दोनों ही तटस्थ रवैया अपना रहे हैं.

कर्नाटक मानता है कि अंग्रेज़ों की हुकूमत के दौरान वो एक रियासत था जबकि तमिलनाडु सीधे ब्रिटिश राज के अधीन था. इसलिए 1924 में कावेरी जल विवाद पर हुए समझौते में उसके साथ न्याय नहीं हुआ.

कर्नाटक ये भी मानता है कि वहाँ कृषि का विकास तमिलनाडु की तुलना में देर से हुआ. और इसलिए भी क्योंकि वो नदी के बहाव के रास्ते में पहले पड़ता है, उसे उस जल पर पूरा अधिकार बनता है.

दूसरी ओर तमिलनाडु का मानना है कि 1924 के समझौते के तहत तय किया गया कावेरी जल का जो हिस्सा उसे मिलता था, वो अब भी जारी रखा जाना चाहिए. और इस मामले में हुए सभी पुराने समझौतों का स्वागत किया जाना चाहिए.

समाधान के रास्ते

क़ानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समस्या के समाधान के क़ानूनी आधार तो मौजूद हैं.

लेकिन जबतक इन चारों संबद्ध राज्यों के बीच जल को लेकर चल रही राजनीति ख़त्म नहीं होती, इस मसले को सुलझाना असंभव होगा.
 
 
अन्य ख़बरें
04 सितंबर, 2002
कर्नाटक ने ब्याज माफ़ किया
03 सितंबर, 2002
कर्नाटक पानी छोड़े: सुप्रीम कोर्ट
28 अगस्त, 2002
कावेरी को लेकर जयललिता नाराज़
इंटरनेट लिंक्स
तमिलनाडु सरकार
कर्नाटक सरकार
बीबीसी अन्य वेब साइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है
ताज़ा समाचार
बग़दाद में दो अमरीकी मरे
फ़लस्तीन में फिर सत्ता संघर्ष?
हेडेन ने तोड़ा लारा का रिकॉर्ड
नाथन एस्टल ने शतक बनाया
तस्वीर भेजी और चकमा दिया
पूर्व गोरखा सैनिक मुक़दमा हारे
कैदियों के हक में उठी आवाज़







BBC copyright   ^^ हिंदी

पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल और खिलाड़ी
कारोबार | विज्ञान | आपकी राय | विस्तार से पढ़िए
 
 
  कार्यक्रम सूची | प्रसारण समय | हमारे बारे में | हमारा पता | वेबगाइड | मदद चाहिए?
 
 
  © BBC Hindi, Bush House, Strand, London WC2B 4PH, UK