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शनिवार, 16 फरवरी, 2002 को 15:39 GMT तक के समाचार
गंगा को स्वच्छ करने का प्रयास
भारत की अधिकतर नदियाँ प्रदूषण की शिकार
भारत की अधिकतर नदियाँ प्रदूषण की शिकार

भारत की सबसे पवित्र माने जाने वाली नदियों में से एक गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्वच्छ गंगा अभियान नाम के ग़ैर सरकारी संगठन ने लंदन स्थित एक संगठन से समझौता करने की योजना बनाई है.

क़रीब ढाई हज़ार किलोमीटर लंबी गंगा नदी भारत के कई राज्यों से होकर बहती है.


बनारस में गंगा की हालत बहुत खराब है. वहाँ लोगों को ये बताए जाने की आवश्यकता है कि वे नदी के आसपास कैसे रहें

मार्क लॉयड, टेम्स 21
गंगा के किनारे ऐसे कई स्थान हैं जहाँ डुबकी लगाने देश के दूर-दराज़ के इलाक़ों से लोग आते हैं.

लेकिन वहाँ प्रदूषण का स्तर मनुष्यों के सुरक्षित समझे जाने वाले स्तर से तीन हज़ार गुना अधिक है.

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ब्रिटेन के टेम्स 21 संगठन के प्रमुख मार्क लॉयड ने कहा कि गंगा के प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह उसमें गिरने वाले गंदगी के नाले हैं.

टेम्स 21 संगठन को ब्रिटेन की सरकार और निजी क्षेत्र दोनों मदद देते हैं.

प्रदूषण की वजह

उन्होंने कहा कि गंगा के प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कुछ कदम तुरंत उठाने होंगे.

इनमें प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध और नदी में पशुओं और मनुष्यों के शवों को बहाने पर रोक लगानी होगी.

मार्क लॉयड ने कहा "बनारस में गंगा की हालत बहुत खराब है. वहाँ लोगों को ये बताए जाने की आवश्यकता है कि वे नदी के आसपास कैसे रहें.''

"निश्चित तौर पर ये एक मुश्किल काम है क्योंकि गंगा नदी को बहुत ही पवित्र समझा जाता है."

गंगा नदी में डुबकी लगाने के लिए हर वर्ष लाखों हिंदू श्रद्धालु बनारस आते हैं.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रथा से गंगा दूषित हो रही है क्योंकि बड़ी तादाद में गंदगी, मनुष्य और पशुओं के शव नदी में डाले जाते हैं.

कई लोग अपने रिश्तेदारों के शव नदी में बहा देते हैं क्योंकि वे या तो इसे पवित्र समझते हैं या फिर उनके पास अंतिम संस्कार करने के लिए पैसे नहीं होते.

जागरुकता का अभाव

लॉयड का कहना है कि उनका संगठन गंगा और लंदन की टेम्स नदी के किनारे प्रदूषण मुक्ति के लिए काम कर रहे स्वयंसेवकों को उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में सलाह देगा.

भारत के ग़ैर सरकारी संगठन स्वच्छ गंगा अभियान के एक सदस्य शांतनु मिश्रा का कहना है कि गंगा को साफ़ करने के लिए पिछले दो दशक में कई बार कोशिश की गई फिर भी प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है.

उनका कहना है कि स्वच्छ गंगा अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों को जागरुक करना आवश्यक है.

इस ग़ैर सरकारी संगठन ने इसके लिए एक वेबसाइट भी शुरू की है. इसका नाम है क्लीनगंगा डॉट कॉम.

भारत सरकार ने गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक दीर्घकालीन योजना बनाई है. इस योजना का पहला चरण पूरा हो चुका है कि लेकिन दूसरा चरण क़ानूनी दाँव-पेंच में उलझ गया है.

नया तरीका

शांतनु मिश्रा का कहना है कि बनारस के इलाक़े में गंगा को साफ़ करने के लिए एक सस्ता और सुरक्षित तरीका है. यह तरीका बिजली पर निर्भर नहीं है.


बढ़ता प्रदूषण
इसमें कूड़े-करकट को गुरुत्वाकर्षण का सहारा लेकर एक बड़े कुंड में जमा कर लिया जाता है जहाँ जैविक तरीके से इसकी सफ़ाई होती है.

कूड़े में से कीटनाशक, लोहा-लक्कड़ और दूसरे प्रदूषकों को हटा दिया जाता है. अमरीका में नदियों की सफ़ाई इसी तरीके से होती है.

उनका कहना है कि बनारस के नज़दीक के गाँववाले गंदा भूमिगत पानी पीने से हमेशा बीमार हो जाते हैं क्योंकि नदी का गंदा पानी भूमिगत पानी को प्रदूषित कर रहा है.

मिश्रा के अनुसार ऐसा नहीं है कि गंगा की खराब हालत सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में ही है बल्कि अन्य राज्यों में भी गंगा प्रदूषित है.
 
 
इंटरनेट लिंक्स
स्वच्छ गंगा अभियान
टेम्स 21
वन और पर्यावरण मंत्रालय
बीबीसी अन्य वेब साइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है
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