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रविवार, 17 फरवरी, 2002 को 19:30 GMT तक के समाचार
क्या है प्लेग?
चूहों के शरीर पर पलने वाले पिस्सुओं की वजह से भी प्लेग की बीमारी फैलती है
चूहों के शरीर पर पलने वाले पिस्सुओं की वजह से भी प्लेग की बीमारी फैलती है

प्लेग की वजह से 14 वीं सदी में यूरोप की एक तिहाई आबादी मारी गई थी. सदियों बाद आज भी विश्व में प्रतिवर्ष प्लेग की लगभग 2000 वारदातें सामने आती है.

क्या है ये बीमारी और कैसे फैलती है?

प्लेग की बीमारी "येरसीनिया पेस्टिस" नामक एक बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है.

अगर संक्रमण की शुरुआत में ही इलाज नहीं किया जाए तो ये बीमारी घातक भी साबित हो सकती है.

प्लेग दो तरह के होते हैं -- न्यूमॉनिक और ब्यूबॉनिक.

चूहों के शरीर पर पलने वाले कीटाणुओं की वजह से भी प्लेग की बीमारी फैलती है और ये अत्यंत संक्रामक होती है.

प्लेग के मरीज़ की सांस और थूक के ज़रिए उनके संपर्क में आने वाले लोगों में भी प्लेग के बैक्टीरिया का संक्रमण हो सकता है.

इसलिए प्लेग के मरीज़ों का इलाज करते समय या उनके संपर्क में रहते समय एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है.

लक्षण

भारत में 1994 में न्यूमॉनिक प्लेग फैल गया था
ब्यूबॉनिक प्लेग के बैक्टीरिया के शरीर में संक्रमण होने से 'लिम्फ़' ग्रंथियों में सूजन आ जाती है और बुख़ार आता है.

न्यूमॉनिक प्लेग की वारदातें अपेक्षाकृत कम होती हैं. लेकिन इस बीमारी में सांस लेने में कठिनाई पैदा होती है और खांसी आती है.

प्लेग की बीमारी पनपने में एक से सात दिन लग सकते हैं.

संक्रमण

ब्यूबॉनिक प्लेग मुख्यतया चूहों के शरीर पर पलने वाले पिस्सुओं के काटने की वजह से फैलती है.

ये बीमारी केवल मरीज़ के संपर्क में आने से तो नहीं लगती लेकिन मरीज़ की ग्रंथियों से निकले द्रव्यों के सीधे संपर्क में आने से ब्यूबॉनिक प्लेग हो सकता है.

मगर न्यूमॉनिक प्लेग ज़्यादा संक्रामक है. ये बीमारी रोगी के सीध संपर्क में आने से उसकी सांसों या खांसी से निकले बैक्टीरिया के संक्रमण से हो सकता है.

इलाज

स्ट्रेप्टोमाइसिन और टेट्रासायक्लाइन जैसी दवाइयों से प्लेग का प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है.

लेकिन अगर इलाज ना किया जाए तो बीमारी से पीड़ित लोगों की मृत्यु दर 90 प्रतिशत तक हो सकती है.

प्लेग से बचने के लिए टीका विकसित करने के लिए शोधकार्य जारी हैं लेकिन अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है.

भारत में 1994 में पश्चिमी क्षेत्रों में 50 से ज़्यादा लोगों की ब्यूबॉनिक प्लेग से मौत हो गई थी.
 
 
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