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मंगलवार, 05 मार्च, 2002 को 06:57 GMT तक के समाचार
कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले सावधान
कंप्यूटर पर काम करने वालों को यह बीमारी ज़्यादा सताती है
कंप्यूटर पर काम करने वालों को यह बीमारी ज़्यादा सताती है

कंप्यूटर, मोबाइल फोन और रिमोट कंट्रोल जैसे उपकरणों ने आप जिंदगी को तो आसान बना दिया है, पर क्या आपको पता है कि यह उपकरण एक नई बीमारी का कारण भी हैं?

'रेपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी' या 'आरएसआई' नाम की यह बीमारी हाथों की कलाइयों, बाहों या कंधों को अपना शिकार बनाती है.

जानकार मानते हैं कि आरएसआई लगातार एक ही काम करने से पैदा होती है.


मेरी उंगलियों में दर्द रहता है, मैं कुछ भी कस कर पकड़ नहीं सकती और गर्दन से लेकर मेरी बाँह तक जलन होती है

वनिता वजीलानी
आम तौर पर यह कंप्यूटर पर काम करने वालों को ज़्यादा परेशान करती है और ब्रिटेन में तो लाखों लोग इसके शिकार हैं.

इससे जूझ रहे लोगों को एक और परेशानी से गुज़रना पड़ता है और वह है अपने अधिकारियों को इस बात का विश्वास दिलाना कि वे सचमुच बीमार हैं.

दो बच्चों की माँ वनिता वजीलानी को आरएसआई के कारण अपने काम में भी परेशानी उठानी पड़ी और उनका पारिवारिक जीवन भी इससे प्रभावित हुआ.

बयालीस वर्षीया वनिता को तीन वर्ष पूर्व यह तकलीफ़ शुरू हुई और फिर आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ती ही गई.

वह कहती हैं, "मेरी उंगलियों में दर्द रहता है, मैं कुछ भी कस कर पकड़ नहीं सकती और गर्दन से लेकर मेरी बाँह तक जलन होती है."

"कई बार तो यह दर्द क़ाबू में आने में एक सप्ताह तक लग जाता है."

वनिता इसके लिए दर्द-निवारक गोलियां ले लेती हैं लेकिन उन्हें यह बता दिया गया है कि उन्हें आजीवन इस कष्ट का सामना करना पड़ेगा.


हाथों की पकड़ तक कमज़ोर हो जाती है
घर में उन्होंने ध्वनि से संचालित कंप्यूटर लगवा लिया है लेकिन उससे वह कुछ सीमित काम ही कर पाती हैं.

अब वह न अपने बच्चों से ठीक से खेल ही पाती हैं और रोज़मर्रा के काम, जैसे सब्ज़ी काटना ही, उनके लिए दुष्कर हो गए हैं.

लेकिन फिर भी वह सौभाग्याशाली हैं कि उनके अधिकारी उनकी परेशानी को समझते हैं.

हालाँकि लंबे समय तक तो उनकी सहानुभूति भी क़ायम नहीं रहेगी.

वनिता का कहना है, "मेरे डॉक्टर ने कहा है कि मैं यह नौकरी छोड़ दूं. लेकिन ग्यारह वर्ष यही काम करने के बाद यह कैसे संभव है."

एहतियात ज़रूरी

स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संस्था ने पिछले सप्ताह नियोक्ताओं को इस बीमारी के ख़तरों के प्रति सचेत करने का एक अभियान शुरू किया है और उसका कहना है कि एहतियात ही सबसे बड़ा इलाज है.

संस्था ने कंपनी मालिको को कुछ नए दिशा-निर्देश दिए हैं, जैसे काम में थोड़े-थोड़े समय में बदलाव लाना और एक ही प्रकार का काम सौंपने से बचना.

मालिकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे कंप्यूटरों की ऊंचाई और कर्मचारियों के बैठने के तरीक़ों आदि पर नज़र रखें.

कम्पनियां लगता है इस पर ज़रूर ध्यान देंगी क्योंकि ब्रिटेन में ही आरएसआई की वजह से उन्हें प्रति वर्ष लगभग बीस करोड़ पाउंड का नुक़सान उठाना पड़ता है.

यही नहीं, इससे पीड़ित एक बैंक कर्मचारी को हाल ही में अदालती कार्रवाई के बाद ढाई लाख पाउंड का मुआवज़ा अदा किया गया है.
 
 
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