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गुरुवार, 23 मई, 2002 को 01:09 GMT तक के समाचार
मलेरिया पर जेनेटिक हमला
मलेरिया की मार लाखों बच्चों पर पड़ती है
मलेरिया की मार लाखों बच्चों पर पड़ती है

जेनेटिक विशेषज्ञों ने मलेरिया के वाहक मच्छरों को काबू में रखने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है.

विज्ञान पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने मच्छरों में एक विशेष जीन प्रतिरोपित कर पाया कि इससे मलेरिया फैलाने की उनकी क्षमता बहुत कम हो जाती है.


मच्छरों को मलेरिया परजीवीरोधी बनाने का प्रयास
अमरीकी और जर्मन वैज्ञानिकों के एक संयुक्त दल की ताज़ा सफलता को मलेरिया उन्मूलन की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है.

हालांकि अभी मच्छरों में विशेष जीन प्रतिरोपित करने का काम प्रयोगशाला में ही हुआ है और इसे आम उपयोग में लाने में काफ़ी समय लग जाता है.

वैज्ञानिकों के दल ने अभी चूहों में होने वाली मलेरिया के एक प्रकार को नियंत्रित करने के लिए मच्छरों में जेनेटिक सुधार किया है.

इस बारे में 'नेचर' में हेइडलबर्ग स्थित यूरोपीयन मोलेक्युलर बायोलॉजी लेबोरेटरी के गैरेथ लाइसेट और फ़ोटिस कैफ़ेटोज़ ने कहा कि अभी काफ़ी कुछ किया जाना है.

लेकिन उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि वैज्ञानिकों की ताज़ा उपलब्धि ने मलेरिया संबंधी अनुसंधान में एक नए युग का सूत्रपात किया है.

महामारी

हर साल दुनिया भर में, ख़ास कर अफ़्रीका के, क़रीब 20 लाख बच्चे मलेरिया का शिकार बनते हैं.

मनुष्यों में मलेरिया का कारण एक परजीवी है, जिसका प्रसार एक विशेष प्रजाति के मादा मच्छरों के जरिए होता है.

दरअसल मलेरिया परजीवी मनुष्य के शरीर में मच्छरों के शरीर से प्रवेश करता है.

अब तक मलेरिया पर काबू पाने की मुख्य रणनीति है कीटनाशक रसायनों के ज़रिए मच्छरों को मारना.

नए अनुसंधान में मच्छरों में एक विशेष जीन प्रतिरोपित किया गया, जो कि उनके शरीर में परजीवियों के विकास को अवरुद्ध कर देता है.

प्रयोगों में पाया गया कि इस तरीके से चूहों में होने वाले मलेरिया पर 80 प्रतिशत तक नियंत्रण पाया जा सकता है.

हालांकि जीन को मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की विभिन्न प्रजातियों में प्रतिरोपित करने से पहले, यह सुनिश्चित किया जाना होगा कि इसका मानव स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा. और यह तय करने में पाँच से दस वर्ष लग सकते हैं.
 
 
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