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गुरुवार, 04 जुलाई, 2002 को 12:43 GMT तक के समाचार
चीन की विशाल पाइपलाइन


चीन में एक विशाल तेल पाइपलाइन बिछाने के लिए काम शुरू हो रहा है जो चीन की दीवार के बाद देश की सबसे बड़ी परियोजना होगी.

चीन की सबसे बड़ी तेल कंपनी पेट्रोचाइना ने देश के पूरब से पश्चिम तक पाइपलाइन बिछाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक शेल के नेतृत्व वाले एक गठजोड़ से समझौता किया है.

उत्तर पश्चिमी चीन के रेगिस्तान से लेकर पूर्वी तट पर बसे शहर शंघाई तक जानेवाली यह पाइपलाइन चीन के इतिहास की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक होगी.

इससे बड़ी सिर्फ़ एक ही परियोजना है. करीब 25 अरब डॉलर की लागत से बन रहा थ्री गौर्जेस बांध.

पाइपलाइन परियोजना से जुड़ी कंपनियां इस चार हज़ार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का काम 2004 तक पूरा कर देना चाहती हैं.

काम पूरा हो जाने के बाद यह पाइपलाइन हर साल 12 अरब घनमीटर गैस शिनजियांग से आठ प्रांतों और दो बड़ी नदियों को पार कर शंघाई तक ले जाया करेगी.

भारी भंडार

ब्रिटिश पेट्रोलियम की भागीदारी वाली कंपनी पेट्रोचाइना इस पाइपलाइन में पचास फ़ीसदी की हिस्सेदार होगी, जबकि शेल और उसकी सहयोगी अमरीकी कंपनी एक्ज़नमोबिल और रूसी गैज़प्रौम पंद्रह-पंद्रह प्रतिशत शेयर लेंगी.

बाकी पांच प्रतिशत शेयर चीन की मुख्य स्वदेशी तेल कंपनी सिनोपेक के हिस्से में जाएंगे.

पेट्रोचाइना के पास शिनजियांग प्रांत के तारिम इलाके में गैस के भारी भंडार हैं. कंपनी इन्हें इस दुर्गम पहाड़ी इलाके से निकालकर बाकी देश तक पहुंचाने के लिए काफ़ी समय से आतुर है.

साथ ही इससे चीन के पर्यावरण को बचाने में भी मदद मिलेगी क्योंकि ज़्यादातर उपभोक्ता फिर कोयले की बजाय गैस का इस्तेमाल करने लगेंगे और चीन के अधिकतर शहरों के ऊपर छाई धुएं की परत छंटने की उम्मीद बढ़ जाएगी.

इस परियोजना पर कुल मिलाकर करीब बीस अरब डॉलर की लागत आएगी, जिसमें से करीब साढ़े पांच अरब डॉलर तो सिर्फ़ पाइपलाइन पर ही ख़र्च होंगे. इनमें से ज़्यादातर रकम तीन विदेशी कंपनियां ही लगाएंगी.

और तेल व गैस की खोज और उसे निकालने के काम में इन कंपनियों को करीब 3.3 अरब डॉलर की रकम और ख़र्च करनी पड़ेगी.
 
 
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