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रविवार, 14 जुलाई, 2002 को 23:18 GMT तक के समाचार
भारत चाँद पर जाएगा
भारत के पास उपग्रह बाज़ार में कदम रखने की क्षमता
भारत के पास उपग्रह बाज़ार में कदम रखने की क्षमता

भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा है कि वह सन् 2007 तक चंद्रमा पर मानवरहित अभियान भेजने के बारे में योजना बना रहा है.


मानवरहित अभियान की तैयारी: कस्तूरीरंगन
भारत के लिए किसी भी दूसरे ग्रह या उपग्रह पर अभियान भेजने का यह पहला अवसर होगा.

इसरो के अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि यह अभियान भेजने का फ़ैसला एक समिति की रिपोर्ट जल्दी ही आने की संभावना के बाद किया गया है.

इस समिति को ऐसे किसी भी अभियान की संभावना का पता लगाने के लिए गठित किया गया था.

कस्तूरीरंगन ने बताया, "इस समिति की रिपोर्ट किसी भी समय आ सकती है."

भारी ख़र्च

इसरो के आकलन के अनुसार चंद्रमा पर मानवरहित अभियान भेजने पर करीब सात अरब रुपए ख़र्च आएगा.

इसमें लॉंच रॉकेट की एक अरब बीस करोड़ रुपए की लागत शामिल है.


इस अभियान में कई तरह के वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएँगे

के कस्तूरीरंगन
कस्तूरीरंगन ने कहा, "इस अभियान में कई तरह के वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएँगे ताकि पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह के बारे में और अधिक जानकारी इकठ्ठी की जा सके."

हालाँकि कस्तूरीरंगन ने स्पष्ट किया कि भारत अभी किसी भी मनुष्य को चंद्रमा पर भेजने की योजना नहीं बना रहा है क्योंकि इसमें बहुत अधिक ख़र्च आएगा.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाज़ार में आलोचकों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था बदहाल है और उसे ऐसा कोई भी अभियान नहीं भेजना चाहिए.

आलोचकों का कहना है कि भारत को चाँद पर अभियान भेजने के बजाए अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने और सामाजिक कार्यक्रम में लगाना चाहिए.

उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि चंद्रमा पर अभियान भेजने की वजह से इसरो के दूसरे कार्यक्रमों में अड़चन आ सकती है.

लेकिन इसरो के एक प्रवक्ता ने इन आशंकाओं को ग़लत बताया है.

प्रवक्ता ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया को बताया "अगर हम चंद्रमा पर अभियान भेजते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम दूसरे कार्यक्रम रोक देंगे. "

रॉकेट परीक्षण

इसरो ने इस वर्ष फ़रवरी में देश मे ही बने क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया था.


जीएसएलवी परीक्षण
यह इंजन उन रॉकेटों में लगता है जो भूस्थिर कक्ष में उपग्रह ले जाते हैं.

अभी तक यह इंजन सिर्फ़ पाँच देशों- अमरीका, रूस, फ़्रांस, चीन और जापान के पास है.

हालाँकि अधिकारियों का कहना है कि इंजन को पूरी तरह से तैयार घोषित करने से पहले कुछ और परीक्षण किए जाएँगे.

इसरो अरबों रुपए के कृत्रिम उपग्रहों के बाज़ार में भी कदम रखना चाहता है.

लेकिन अभी तक इसरो के पास भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता नहीं है.

भारत ने पिछले वर्ष 18 अप्रैल को जीएसएलवी ( जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल) का परीक्षण किया था. लेकिन यह रॉकेट भी भूस्थिर कक्षा में सिर्फ़ दो टन तक वज़न ही ले जा सकता है.
 
 
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