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शुक्रवार, 27 सितंबर, 2002 को 16:53 GMT तक के समाचार
भारत में कॉफ़ी क्रांति
पश्चिमी देशों के कैफ़े की तर्ज़ पर खुल रहे हैं भारतीय कॉफ़ी बॉर
पश्चिमी देशों के कैफ़े की तर्ज़ पर खुल रहे हैं भारतीय कॉफ़ी बॉर

संजीव श्रीवास्तव

भारत के नगरों में इतालवी शैली के कॉफ़ी बारों की संख्या में आहिस्ता-आहिस्ता हो रही बढोत्तरी से स्पष्ट है कि वहाँ एक कॉफ़ी क्रांति चल रही है.

ज़ाहिर है चाय उद्योग के लिए यह कोई अच्छी ख़बर नहीं है.


शहरी युवाओं में लोकप्रिय कॉफ़ी
चाय अब भी ज़्यादातर भारतीयों का पसंदीदा पेय पदार्थ है.

भारत न सिर्फ़ चाय का सबसे बड़ा निर्यातक, बल्कि सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है.

हाल के वर्षों में भारत में चाय की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है.

चाय उद्योग के लिए बुरी ख़बर यह कि युवा और प्रगतिशील भारतीयों के लिए क़ॉफ़ी एक फ़ैशन बनती जा रही है.

कॉफ़ी बार का भारत में कुछ साल पहले तक कोई नामलेवा नहीं था, लेकिन आज दबे पाँव ये महानगर ही नहीं छोटे शहरों में भी पहुँच रहे हैं.

क़ॉफ़ी संस्कृति

दिल्ली में कॉफ़ी संस्कृति की इतनी धमक है कि पिछले साल वहाँ पहली दुकानें खोलने वाली कंपनी बारिस्ता हर दूसरे सप्ताह एक दुकान खोल रही है.

स्टारबक्स जैसी अमरीकी और यूरोपीय कंपनियों से सीख लेते हुए बारिस्ता और अन्य कंपनियाँ उपभोक्ताओं को कॉफ़ी की ओर आकर्षित करने के लिए हर तरक़ीब आजमा रही हैं.

बारिस्ता के मुख्य कार्यकारी रवि देवल ने कहा, "उपभोक्ताओं में जागरुकता बढ़ रही है. उनकी सोच एक जैसी दिखती है. वे एक जैसे उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं."

उन्होंने कहा, "ब्रिटेन और जापान जैसे चायप्रेमी देश पहले ही कॉफ़ी प्रेम दिखा चुके हैं और भारतीय उपभोक्ता भी उसी दिशा में बढ़ रहे हैं."


ब्रिटेन और जापान जैसे चायप्रेमी देश पहले ही कॉफ़ी प्रेम दिखा चुके हैं और भारतीय उपभोक्ता भी उसी दिशा में बढ़ रहे हैं

रवि देवल
इन कॉफ़ी दुकानों में पेय पदार्थों और स्नैक के साथ-साथ और भी बहुत कुछ मिलता है.

मसलन यहाँ आने वाले पश्चिमी जीवन शैली से अपने जुड़ाव को नई पहचान मिलती देखते हैं.

चाय भी मैदान में

ऐसा भी नहीं है कि कॉफ़ी की संस्कृति के ख़िलाफ़ चाय वाले मूकदर्शक बने हैं.

दिल्ली में लोकप्रियता हासिल कर चुके टी-हाउस 'चा बार' को युवाओं से जोड़े रखने के लिए चमकाए रखा जाता है.

कुछ चाय कंपनियों ने बाज़ार में पाँव जमाए रखने के लिए वेंडिंग मशीनों जैसी तरक़ीबों का सहारा लिया है.

पिछले कुछ वर्षों में भारत में जगह-जगह चाय की 50 हज़ार से ज़्यादा वेंडिंग मशीनें लगाई जा चुकी हैं.

चाय और कॉफ़ी की जंग नगरों तक ही सीमित है, लेकिन ग्रामीण इलाक़ों में अब भी चाय का एकछत्र राज्य है.

गाँवों, छोटे कस्बों और लाइन होटलों में चाय की लोकप्रियता को बारिस्ता जैसी कॉफ़ी कंपनियों से कोई चुनौती नहीं लगती.
 
 
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