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शनिवार, 09 नवंबर, 2002 को 06:27 GMT तक के समाचार
शायर जॉन एलिया नहीं रहे
जॉन एलिया का एक संकलन 'यानी' प्रकाशित होने वाला है
जॉन एलिया का एक संकलन 'यानी' प्रकाशित होने वाला है

उर्दू के मशहूर शायर जॉन एलिया का शुक्रवार को कराची देहांत हो गया.

पैंसठ वर्षीय जॉन एलिया को शुक्रवार रात को दमा का दौरा पड़ा था और उन्होंने अस्पताल ले जाते समय ही दम तोड़ दिया.

अनेक भाषाओं के जानकार जॉन एलिया का जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा शहर में हुआ था और वे मशहूर फ़िल्मकार और शायर कमाल अमरोही के भाई थे.

उनके परिवार में दो बेटियाँ और एक बेटा हैं और उनकी पत्नी ज़ाहिदा हिना एक मशहूर लेखक और स्तंभकार हैं.

लेकिन जॉन एलिया कुछ समय से अपनी पत्नी से अलग थे और अपने भतीजे के साथ रह रहे थे.


......अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं,
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या....

जॉन एलिया
जॉन एलिया 1937 में अमरोहा में पैदा हुए.

उनकी प्रारंभिक शिक्षा परिवार में ही हुई थी.

उनके पिता सैयद शफ़ीक़ हुसैन ख़ुद भी अनेक भाषाओं के विद्वान और शायर थे.

ख़ुद जॉन एलिया के मुताबिक वह अरबी, फ़ारसी, हिब्रू और कई अन्य भाषाओं के जानकार थे.

सबसे छोटे

जॉन एलिया पाँच भाइयों में सबसे छोटे थे. कमाल अमरोही के अलावा उनके एक और भाई रईस अमरोहवी जाने माने विचारक, स्तंभकार और शायर थे.

एक दूसरे भाई सैयद मोहम्मद तक़ी पाकिस्तान के जाने माने पत्रकार और दर्शन शास्त्र के विद्वान थे.

वे पाकिस्तान के मशहूर अख़बार जंग के संपादक रहे.

जॉन एलिया हालाँकि शिया थे लेकिन उन्होंने अरबी की शिक्षा देवबंद में हासिल की थी जो ख़ासकर सुन्नी मुसलमानों का शिक्षा केंद्र है.

जॉन एलिया ने अरबी की अनेक किताबों का अनुवाद किया लेकिन अनुवाद और शायरी की उनकी अनेक पुस्तकें उनके जीवन में प्रकाशित नहीं हो सकीं.

एक ग़ज़ल

गाहे गाहे बस अब यही हो क्या,
तुम से मिलकर बहुत ख़ुशी हो क्या.

मिल रही हो बड़े तपाक के साथ,
मुझको यक्सर भुला चुकी हो क्या.

याद हैं अब भी अपने ख़्वाब तुम्हें,
मुझसे मिलकर उदास भी हो क्या.

बस मुझे यूँ ही इक ख़याल आया,
सोचती हो, तो सोचती हो क्या.

अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं,
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या.

क्या कहा इश्क़ जावेदानी है,
आख़िरी बार मिल रही हो क्या.
 
 
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