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मंगलवार, 07 अक्तूबर, 2003 को 23:45 GMT तक के समाचार
इच्छाशक्ति की जीत


आठ साल की गैमा क्विन की ज़िदगी में उस समय अंधकार छा गया जब एक कार दुर्घटना में लक़वा मार जाने के बाद उनके शरीर का गर्दन से नीचे के भाग में हरकत बंद हो गई.

लेकिन हैरानी की बात ये है कि उस कार दुर्घटना के ग्यारह साल बाद गैमा क्विन ने चलने-फिरने की शुरुआत की है.


गैमा को बताया गया था कि वे कभी भी चल नहीं पाएँगी
ये सब अचानक नहीं हुआ. इसमें उनके दृढ़संकल्प होने और मानसिक प्रशिक्षण करने की बहुत बड़ी भूमिका रही है.

मानसिक प्रशिक्षण

ब्रिटेन निवासी गैमा को दुर्घटना के बाद बताया गया था कि वे शायद कभी भी चल नहीं पाएँगी और उन्हें सदा पहिए वाली कुर्सी का इस्तेमाल करना होगा.

इसका कारण था उनकी रीढ़ की हड्डी में आई गंभीर चोट.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं सदा ही ख़ुद चलने-फिरने का कोई न कोई तरीका खोजती रहती थी. "

उनकी हालत में सुधार तब आना शुरु हुआ जब कुछ ही महीने पहले उन्होंने शरीर और दिमाग का एक प्रशिक्षण शुरु किया जिसे 'मांइड थिरैपी' कहते हैं.


मैं जब पहली बार चली तो केवल कुछ ही कदम चल पाई. अगले दिन छह कदम चली. अब मैं बीस कदम तक चल सकती हूँ

गैमा क्विन
गैमा इस प्रशिक्षण के लिए लंदन में रहने लगीं जिसके तहत उन्होंने गंभीर मानसिक अभ्यास किए.

उनका कहना है, "मेरे अपने पैरों पर खड़े होने से मुझे ख़ुद को बहुत हैरानी हुई. लेकिन ये अभ्यास के बाद अपने आप ही हो गया."

उन्होंने बताया, "मैं जब पहली बार चली तो केवल कुछ ही कदम चल पाई. अगले दिन छह कदम चली. अब मैं बीस कदम तक चल सकती हूँ."

उनका मानना है कि उन्हें अब भी बहुत अभ्यास और प्रगति करनी है.

उन्हें प्रशिक्षण देने और ये रास्ता दिखाने वाले है लंदन के 'माइंड इंस्ट्रक्टर क्लिनिक' के हृरैच ओगाली जो गैमा को 'अदभुत महिला' कहती हैं.

लेकिन ब्रिटेन के स्पाइनल रिसर्च चैरिटी के जॉन केवेनाग का कहना है, "ये गैमा के लिए बहुत अच्छी बात है. लेकिन इसे रीढ़ की हड्डी की चोट के इलाज के तौर पर नहीं देखना चाहिए. शायद वे ये सब करने में पहले से ही सक्षम थीं और इसका अहसास अब ही हुआ है."
 
 
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