न्यूयॉर्क में मुस्लिम सांस्कृतिक महोत्सव

  • 26 जून 2009
फ़ेस्ट
Image caption पूरे न्यूयॉर्क शहर में अनेक स्थानों पर महोत्सव से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

न्यूयॉर्क में इनदिनों एक विशेष सांस्कृतिक महोत्सव चल रहा है जिसमें भारत और मुस्लिम देशों के सौ से ज़्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं.

भारत की ओर से जो दल वहाँ पहुँचा है उसमें हिंदी अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी शामिल हैं.

इस महोत्सव का मक़सद अमरीका के लोगों में मुस्लिम कला और संस्कृति के ज़रिए मुसलमानों और इस्लाम के बारे में जानकारी बढ़ाना है.

भारत और पाकिस्तान के अलावा विश्व के 23 देशों के बहुत से कलाकार और विद्वान इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं.

यह महोत्सव ऐसे समय हो रहा है कि जब पिछले हफ़्ते ही अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्व भर के मुसलमानों को संबोधित करते हुए अमरीका और मुसलमानों के बीच एक नए दौर की शुरूआत करने का आहवान किया है.

नाटक, फ़िल्में, संगीत

इस महोत्सव में कला के साथ-साथ मुस्लिम और ग़ैर-मुस्लिम विद्वान भी विचारों का आदान प्रदान कर रहे हैं.

पूरे न्यूयॉर्क शहर में अनेक स्थानों पर इस महोत्सव से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

दस दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में शहर के विभिन्न हिस्सों में कहीं नाटक और फ़िल्में तो कहीं अरब देशों का संगीत, सूफ़ी और शास्त्रीय संगीत, क़व्वाली और बहुचर्चित डेबका नृत्य भी आयोजित किया जा रहा है.

इन कार्यक्रमों को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है.

भारत से इस महोत्सव में शामिल होने के लिए हिंदी फ़िल्मों के अभिनेता नसीरूद्दीन शाह भी आए हुए हैं.

वे एक उर्दू-हिंदी नाटक दास्तानगोई और अमीर हमज़ा में मुख्य क़िरदार निभा रहे हैं. इस नाटक को महमूद फ़ारूकी ने लिखा है और इसमें दिल्ली की दास्तानगोई कला को उजागर करने की कोशिश की गई है.

साझा प्रस्तुति

Image caption महोत्सव में मेले का भी आयोजन है जिसमें विभिन्न देशों की संस्कृतियों की झलक है.

नसीरुद्दीन शाह कहते हैं, "इस तरह के कार्यक्रमों के ज़रिए हम चाहते हैं कि अमरीका में रहने वाले विभिन्न देशों के लोग जो भारत, पाकिस्तान के अलावा इंडोनिशिया और अन्य मुस्लिम देशों से यहां आकर रह रहे हैं, उन्हें उनकी संस्कृति की याद दिलाई जाए. हमें उम्मीद है कि हम इसमें कामयाब होंगे क्योंकि हम बड़े ज़ोर शोर से यह कोशिश कर रहे हैं."

यह महोत्सव न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसायटी, ब्रुक्लिन म्यूज़िक एकेडेमी और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ़ डायलॉग की साझा प्रस्तुति है.

अमरीका में इस तरह के महोत्सव के आयोजन का कारण बताते हुए एशिया सोसायटी की अध्यक्ष विशाखा देसाई कहती हैं, "आजकल जो सबसे बड़ा मसला है वह है पश्चिम और मुस्लिम समाज के बीच तनाव और एक दूसरे के बारे में कम जानकारी. बहुत से ग़ैर-मुस्लिम अमरीकी लोगों में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े धर्म इस्लाम के बारे में या तो सीमित या ग़लत जानकारी है.”

इस महोत्सव में अफ़ग़ानिस्तान, मोरोक्को, ट्यूनिशिया, फ़्रांस, ब्रिटेन, सेनेगाल और ईरान जैसे विभिन्न देशों के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं.

पाकिस्तान की शिल्पकार महविश चिश्ती भी इस महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं.

मेले का भी आयोजन

महोत्सव में एक मेले का भी आयोजन किया गया है जिसमें दुनिया भर के विभिन्न देशों की अलग-अलग संस्कृतियों की भी झलक मिलती है.

मेले में करीब 150 दुकानों में तरह तरह के कपड़ों और आभूषणों के अलावा कला की वस्तुओं और खाने पीने की चीज़ो को भी प्रदर्शित किया जा रहा है.

न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय मे सामाजिक विषयों की एक अध्यापिका अनालीसा बुटिच्ची भी अपनी दोस्त ज़किया के साथ मेले का आनंद ले रही थीं.

उन्होंने कहा, "ऐसे मेले तो एक हफ़्ता नहीं बल्कि कहीं ज़्यादा लंबे समय के लिए लगाए जाने चाहिए जिससे लोगों में मुसलमानों के प्रति जानकारी बढ़े.”

विश्व भर के कई देशों से अनेक विद्वान भी इस महोत्सव में चलने वाली बहस में हिस्सा लेने आए हुए हैं. बहस का मुद्दा है-इस्लाम और पश्चिम के बीच संबंध कैसे सुधारे जाएं? .

कला और विचारों के ज़रिए कैसे यह संबंध सुधारे जा सकते हैं इस पर भी बहस हो रही है.

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