राष्ट्रपति चुनाव में अहमदीनेजाद की जीत

महमूद अहमदीनेजाद
Image caption सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई ने महमूद अहमदीनेजाद को जीत पर बधाई दी ह

ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में महमूद अहमदीनेजाद की शानदार जीत हुई है. चुनाव आयोग ने अहमदीनेजाद की जीत की घोषणा कर दी है.

चुनाव आयोग के मुताबिक़ महमूद अहमदीनेजाद को 60.2 प्रतिशत मिले. जबकि 85 प्रतिशत लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया.

अहमदीनेजाद के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रधानमंत्री मीर हुसैन मुसावी ने भी जीत का दावा किया है और नतीजों को खिलवाड़ बताया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि मतों की गिनती में गड़बड़ी की गई है.

लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई ने महमूद अहमदीनेजाद को जीत पर बधाई दी है और विपक्षी नेताओं से अपील की है कि वे उकसाने वाली कार्रवाई न करें.

एक बयान में ख़ामेनेई ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए लोगों को बधाई दी है और कहा है, "दुश्मन ग़लत भावना से लोगों को भड़काकर इस जीत की ख़ुशी को ख़राब कर सकते हैं."

तेहरान से बीबीसी संवाददाता का कहना है नतीजे महमूद अहमदीनेजाद के लिए काफ़ी अहम हैं क्योंकि उन्हें अपने विरोधियों के गढ़ में भी ज़्यादा मत मिले.

पुलिस ने मीर हुसैन मुसावी के मुख्यालय को सील कर दिया है. उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई है.

मुसावी के समर्थक एक संवाददाता सम्मेलन करने की कोशिश कर रहे थे. एक विपक्षी अख़बार भी बंद कर दिया गया है और ऐसा माना जा रहा है कि अधिकारियों ने बीबीसी की वेबसाइट को भी ब्लॉक कर दिया है.

आरोप

महमूद अहमदीनेजाद के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मीर हुसैन मुसावी को उम्मीद थी कि वे अहमदीनेजाद को 50 प्रतिशत से ज़्यादा मत नहीं मिलने देंगे. इससे दोबारा मतदान कराना पड़ता.

लेकिन ईरानी चुनाव आयोग का कहना है कि मुसावी को क़रीब 34 प्रतिशत मत मिले. महमूद अहमदीनेजाद की जीत का रास्ता साफ़ होते देख मुसावी ने शनिवार को एक बयान जारी किया.

पूर्व प्रधानमंत्री ने नतीजों को ख़ारिज करते हुए कहा कि नतीजों में गड़बड़ी की गई है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ मुसावी ने अपने बयान में कहा है- मैं निजी रूप से इन गड़बड़ियों का विरोध करता हूँ. मैं इस ख़तरनाक खेल के आगे हथियार नहीं डालूँगा.

उन्होंने आरोप लगाया कि मतपत्रों की कमी थी और लाखों लोग मतदान नहीं कर पाए.

अहमदीनेजाद को छोड़कर बाक़ी सभी तीन उम्मीदवारों ने देश की शक्तिशाली उलेमा परिषद से अपील की है कि वह इस नतीजे को रद्द करे और फिर से मतदान कराए.