मुस्लिम देशों से रिश्ते सुधारने की अपील

  • 26 जून 2009
बराक ओबामा
Image caption काहिरा विश्वविद्यालय में ओबामा ने मुस्लिम देशों के साथ अमरीका के रिश्तों पर ज़ोर दिया

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीका और मुस्लिम देशों के बीच 'संदेह और विवाद का चक्र' ख़त्म होना चाहिए.

मध्य पूर्व देशों के दौरे के क्रम में मिस्र की राजधानी काहिरा पहुँचे बराक ओबामा ने अपने महत्वपूर्ण संबोधन में मुस्लिम देशों के साथ रिश्तों में नई शुरुआत की अपील की.

उन्होंने माना कि दोनों पक्षों के बीच वर्षों से अविश्वास रहा है. बराक ओबामा ने कहा कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे का सम्मान करने और एक समझ विकसित करने के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए.

काहिरा विश्वविद्यालय में अपने भाषण के दौरान ओबामा ने मुस्लिम देशों के साथ अमरीका के रिश्तों पर ज़ोर दिया.

'नई शुरुआत'

उन्होंने कहा, "मैं यहाँ अमरीका और मुस्लिम देशों के बीच नई शुरुआत करने आया हूँ. जो आपसी हितों और एक-दूसरे के सम्मान पर आधारित होगा."

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि 'हिंसक चरमपंथियों' ने भय का माहौल पैदा कर दिया है. लेकिन संदेह और विवाद का यह चक्र अब ख़त्म होना चाहिए.

हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक भाषण से वर्षों से चला आ रहा अविश्वास ख़त्म नहीं हो सकता.

लेकिन उन्होंने अपील की कि दोनों पक्ष अपने दिल की बातें खुले रूप से कहें, जो बातें पहले बंद कमरे में की जाती थी. राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि इस्लाम हमेशा से अमरीका से जुड़ा रहा है.

उन्होंने कहा कि बराक हुसैन ओबामा नाम के एक अफ़्रीकी-अमरीकी के राष्ट्रपति बनने पर बहुत कुछ कहा गया है लेकिन सच ये है कि उनकी निजी कहानी अनूठी नहीं है.

ओबामा ने कहा, "अमरीका में सभी के लिए अवसर का सपना पूरा नहीं हुआ है लेकिन ये वादा उन सभी लोगों के लिए हैं, जो हमारे यहाँ आते हैं और इनमें अमरीका के 70 लाख मुसलमान भी शामिल हैं."

भरोसा

इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अमरीका इन देशों में स्थायी सैनिक अड्डे स्थापित करना नहीं चाहता.

उन्होंने कहा, "हम ख़ुशी-ख़ुशी अपने सभी सैनिकों को वहाँ से वापस बुला लेंगे, अगर हमें भरोसा हो जाए कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में हिंसक चरमपंथी नहीं बचे हैं, जो ज़्यादा से ज़्यादा अमरीकी लोगों को मारना चाहते हैं. लेकिन अभी ऐसी स्थिति नहीं है."

इसराइल-फ़लस्तीनी मुद्दे पर राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अमरीका और इसराइल के बीच अटूट संबंध है. उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनियों को हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहिए क्योंकि हिंसक प्रतिरोध और हत्या ग़लत है.

हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फ़लस्तीनियों के लिए स्थिति असहनीय है. ओबामा ने कहा, "इसराइल को ये स्वीकार करना चाहिए कि जिस तरह इसराइल के अस्तित्त्व को चुनौती नहीं दी जा सकती उसी तरह फ़लस्तीनियों को भी ऐसा ही अधिकार है."

ईरान मुद्दा

पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के अहम मुद्दे पर उन्होंने कहा कि शांति की दिशा में तब तक प्रगति नहीं हो सकती जब तक ऐसे निर्माण कार्य पर रोक न लगे.

इसराइल इन इलाक़ों में निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार करता रहा है, दूसरी ओर फ़लस्तीनियों का कहना है कि इस पर रोक लगे बिना शांति की दिशा में प्रगति नहीं हो सकती.

ईरान के परमाणु मुद्दे पर राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "किसी भी एक देश को ये अधिकार नहीं है कि वह ये चुने कि किस देश के पास परमाणु हथियार होने चाहिए."

उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का अधिकार है. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ नहीं होनी चाहिए.

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