सार्कोज़ी ने बुरक़े पर सवाल उठाया

निकोला सार्कोज़ी
Image caption सारकोज़ी ने कहा है बुरक़ा महिलाओं की मान-मर्यादा पर स्वाल उठाता है

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने फ़्रांस की मुसलमान महिलाओं के बुरक़ा पहनने पर कड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि बुरक़ा का फ़्रांस में स्वागत नहीं है.

एक महत्वपूर्ण नीतिगत भाषण में सार्कोज़ी ने कहा कि सर से पांव तक महिलाओं को ढँकने वाला बुरक़ा ग़ुलामी का प्रतीक है और उनकी गरिमा की अनदेखी करता है.

सार्कोज़ी ने इस सिलसिले में एक संसदीय आयोग के गठन हिमायत की है जो ये सुनिश्चित करेगी कि बुरक़े पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या नहीं.

फ़्रांस के 65 सांसदों ने फ़्रांस में बुरक़े के बढ़ते चलन पर एक संसदीय आयोग के गठन की बात की थी.

बीबीसी संवाददाता इमा जेन कर्बी ने फ़्रांस से ख़बर दी है कि सार्कोज़ी ने वारसा में फ़्रांसीसी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि सर से पांव तक ढँकने वाला इस्लामी हिजाब बुरक़ा धार्मिक प्रतीक नहीं है बल्कि महिलाओं की ग़ुलामी का प्रतीक है.

प्रतिबंध

फ़्रांस के स्कूलों में बुरक़ा पहनने पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है.

फ़्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि वे फ़्रांस की धरती पर महिलाओं को किसी सलाखों के पीछे छुपा नहीं देख सकते है.

सार्कोज़ी ने कहा कि बुरक़ा महिलाओं की समानता और उनकी मान-मर्यादा के बारे में सवाल उठाता है.

फ़्रांस के कई सांसद पहले ही इस पर सवाल उठा चुके हैं कि बुरक़ा फ़्रांसीसी धर्मनिरपेक्षता की अनदेखी करता है.

वे ये जानना चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाएँ अपनी मर्ज़ी से बुरक़ा पहनन रही हैं या उन्हें ज़बरदस्ती पहनाया जा रहा है.

एक सौ साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने संसद को संबोधित किया हो. पहले संवैधानिक रूप से इस पर प्रतिबंध लगा हुआ था, लेकिन पिछले साल बहुत कम बहुमत से ये प्रतिबंध हटा लिया गया था.