ग़ज़ा पट्टी 'दुश्मन' क्षेत्र घोषित

  • 30 जून 2009
ग़ज़ा रॉकेट हमला
Image caption ग़ज़ा से इसराइल में रॉकेट हमले होते हैं

इसराइल ने फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी से लगातार हो रहे रॉकेट हमलों के जवाब में ग़ज़ा पट्टी को "दुश्मन" घोषित कर दिया है जिसके परिणामस्वरूप अब इसराइल ग़ज़ा पट्टी में बिजली और पानी बंद कर सकता है.

उधर ग़ज़ा पट्टी में सक्रिय फ़लस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि इसराइल के इस क़दम का मतलब निकाला जाएगा कि उसने युद्ध की घोषणा कर दी है. क़रीब एक पखवाड़ा पहले ग़ज़ा पट्टी से एक रॉकेट इसराइल के एक सैनिक अड्डे पर दागा गया था जिसमें 69 सैन्यकर्मी ज़ख़्मी हुए थे. उसके बाद फ़लस्तीनी चरमपंथियों के रॉकेट हमलों के जवाब में कार्रवाई करने के लिए इसराइली सरकार पर आम लोगों का दबाव बढ़ रहा है. फ़लस्तीनी चरमपंथी गुटों का कहना है कि रॉकेट हमले ग़ज़ा और पश्चिमी तट इलाक़ो में इसराइली सेना की कार्रवाई के बदले में किए जा रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून

इसराइली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट के कार्यालय ने कहा है कि मंत्रिमंडल ने बुधवार सुबह हुई एक बैठक में ग़ज़ा पट्टी को "दुश्मन" घोषित करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.

इसराइली प्रधानमंत्री के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इस ऐलान के बाद अब ग़ज़ा पट्टी में आयात पर कुछ पाबंदियाँ होंगी और ईंधन और बिजली की आपूर्ति में भी कटौती की जाएगी. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ये प्रतिबंध लागू करने से पहले इसराइली अधिकारी यह जाँच-पड़ताल करेंगे कि इसके क़ानूनी और मानवीय परिणाम क्या होंगे. इसराइली अधिकारियों ने कथित तौर पर उम्मीद जताई है कि नए क़दमों से हमास पर अपने रॉकेट हमले रोकने के लिए दबाव बढ़ेगा. ग़ौरतलब है कि हमास ने जून 2007 में एक अन्य फ़लस्तीनी संगटन फ़तह को ग़ज़ा से बाहर निकालकर अपना नियंत्रण बना लिया है. समाचार एजेंसी एपी ने एक इसराइली अधिकारी के हवाले से कहा कि प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने मंत्रिमंडल की बैठक में कहा, "इस घोषणा का उद्देश्य हमास को कमज़ोर करना है." ग़ज़ा में हमास एक प्रवक्ता ने फ़ावज़ी बरहौम ने इसराइली सरकार के इस फ़ैसले की निंदा करते हुए कहा है, "यह युद्ध की घोषणा है और हमारे लोगों के ख़िलाफ़ एक यहूदियों की आपराधिक और आतंकवादी कार्रवाई है." हमास के प्रवक्ता ने कहा, "उनका मक़सद हमारे लोगों को भूखा मारना है और दबाव बनाकर उन्हें नवंबर में प्रस्तावित शांति सम्मेलन के अपमानजनक प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए बाध्य करना है." ग़ौरतलब है कि नवंबर 2007 में इसराइली-फ़लस्तीन संघर्ष पर सम्मेलन का प्रस्ताव है जिसे अमरीका आयोजित करेगा. संवाददाताओं का कहना है कि ग़ज़ा पट्टी को दुश्मन क्षेत्र घोषित करने के बाद इसराइल यह कह सकता है कि अब वह उस क्षेत्र में रहने वाले लगभग 15 लाख लोगों के लिए ज़रूरी सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों से बाध्य नहीं है. लेकिन मौजूदा स्थिति ये है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत इसराइल तटीय इलाक़ों के लिए क़ानूनी तौर पर ज़िम्मेदार है हालाँकि वहाँ से इसराइल दो साल पहले अपनी सेनाएँ हटा चुका है लेकिन ग़ज़ा की सीमाएँ, हवाई और जल क्षेत्रों पर अब भी इसराइल का ही नियंत्रण है.

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