मैडॉफ़ को मिली 150 साल की सज़ा

मैडॉफ़
Image caption मैडॉफ़ ने नैस्डैक स्टॉक एक्सचेंज के चेयरमैन के रूप में भी काम किया था

अमरीका के इतिहास के सबसे बड़े निवेश घोटाले के मामले में फ़ाइनेंसर बर्नार्ड मैडॉफ़ को 150 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

न्यूयॉर्क की अदालत ने यह फ़ैसला सुनाया है. निवेशकों को 65 अरब डॉलर का चूना लगाने के मामले में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था. इस सज़ा का मतलब ये हुआ कि मैडॉफ़ अपनी बची हुई ज़िंदगी जेल में ही गुज़ारेंगे. जैसे ही अदालत ने मैडॉफ़ को सज़ा सुनाई, वहाँ मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाकर इस फ़ैसले का स्वागत किया. जज डेनी चिन ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि वे ये संदेश देना चाहते हैं कि मैडॉफ़ का अपराध 'असाधारण दुष्टता' थी. मैडॉफ़ के वकीलों ने अदालत से उदार रुख़ अपनाते हुए 12 साल की सज़ा देने का अनुरोध किया था.

आरोप

जज डेनी चिन ने मैडॉफ़ को सभी 11 आरोपों में अधिकतम सज़ा दी. इन आरोपों में धोखाधड़ी और काले धन को सफ़ेद करने का आरोप था. जज ने कहा, "ये संदेश ज़रूर जाना चाहिए कि मैडॉफ़ का अपराध असाधारण दुष्टता थी. इस तरह व्यवस्था को इस्तेमाल करना न सिर्फ़ ऐसा रक्तहीन अपराध है, जो काग़ज़ पर होता है बल्कि इससे बहुत बड़ा नुक़सान होता है." उन्होंने कहा कि इस मामले में बहुत बड़ा भरोसा टूटा है. जज चिन ने यह भी बताया कि मैडॉफ़ के न तो किसी परिजन, मित्र और अन्य समर्थकों ने उनके लिए पत्र लिखकर कुछ निवेदन किया. इस सुनवाई के बाद मैडॉफ़ की पत्नी रूथ ने एक बयान में कहा है कि वो अपने को ठगा हुआ और दिग्भ्रमित महसूस कर रही हैं.

उन्होंने कहा, "इतनी बड़ी धोखाधड़ी करने वाला ये व्यक्ति वो नहीं है, जिसे मैं इतने वर्षों से जानती हूँ." सज़ा सुनाए जाने से पहले मैडॉफ़ ने इसके लिए माफ़ी मांगी कि उनके कारण उनके परिवार और इस इंडस्ट्री को शर्मसार होना पड़ा है.

माफ़ी

मैडॉफ़ ने कहा, "मैं इस पीड़ा और दुख के लिए ज़िम्मेदार हूँ. मैं इसे समझता हूँ." मैडॉफ़ अब अपनी बची हुई ज़िंदगी जेल में गुज़ारेंगे.

अदालत में उनकी धोखाधड़ा के शिकार लोगों को संबोधित करते हुए मैडॉफ़ ने अपने किए पर खेद जताया. बीबीसी की उत्तरी अमरीकी बिज़नेस संवाददाता मिशेल फ़्लेवरी का कहना है कि धोखा खाए लोग ख़ुश तो हैं लेकिन उनके लिए लड़ाई यही ख़त्म नहीं होती क्योंकि वे अपना कुछ पैसा वापस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. सुनवाई के दौरान बर्नार्ड मैडॉफ़ ने स्वीकार किया था कि उन्होंने हज़ारों निवेशकों को पोंज़ी स्कीम के तहत चूना लगाया. ये स्कीम वे 1990 के दशक से चला रहे थे.

बर्नार्ड मैडॉफ़ ने अपना वित्तीय करियर 22 वर्ष की उम्र में पाँच हज़ार डॉलर से शुरू किया था. वर्ष 1960 में उन्होंने बर्नार्ड एल मैडॉफ़ इन्वेस्टमेंट सिक्यूरिटीज़ का गठन किया.

धोखाधड़ी

उनकी कंपनी शेयर बेचने और ख़रीदने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन गई. और तो और मैडॉफ़ ने नैस्डैक स्टॉक एक्सचेंज के चेयरमैन के रूप में भी काम किया. पिछले 16 वर्षों में आठ बार मैडॉफ़ की कंपनी की जाँच हुई. लेकिन उनकी कलई उस समय खुली जब विश्वव्यापी मंदी के कारण उन्होंने सात अरब डॉलर की राशि निकालने की कोशिश की. मैडॉफ़ निवेशकों से पैसा लेते थे और उसे किसी दूसरी जगह निवेश करने का दिखावा करते हुए उसे एक बैंक खाते में ही जमा करते जाते थे. मैडॉफ़ का तरीक़ा काफ़ी दिलचस्प था. वे निवेशकों को जल्दी ही भुगतान करना शुरू कर देते थे लेकिन यह भुगतान लाभ की रकम से नहीं, बल्कि दूसरे निवेशकों के पैसे से किया जाता था.