'ब्रितानी के ख़िलाफ़ ईरान में मुकदमा'

  • 4 जुलाई 2009
ईरान में प्रदर्शन

ईरान के मुख्य मौलवी ने कहा है कि तेहरान में ब्रितानी दूतावास के जिन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था उनमें से कुछ के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया जाएगा.

ईरान का कहना है वहां हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद इन लोगों ने प्रदर्शनों को हवा दी. गार्डियन काउंसिल के प्रमुख अहमद जन्नाती ने कहा, "स्वाभाविक है कि उनके ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया जाएगा, इन लोगों ने आरोप स्वीकार कर लिए हैं." अयातुल्ला जन्नाती ने ये नहीं बताया कि कितने लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाया जाएगा या आरोप क्या हैं. उन्होंने शुक्रवार को कहा, "चुनाव के बाद दुश्मन लोगों की ख़ुशी नहीं देख पाए. दुश्मन ने लोगों के दिमाग़ में ज़हर भरने की कोशिश की. " बीबीसी संवाददाता जॉनथन मार्कस का कहना है कि अयातुल्ला जन्नाती के भाषण से ब्रिटेन और ईरान के पहले से ही बिगड़े संबंधों में और खटास आई है.

विवाद

तेहरान में पिछले सप्ताहांत ब्रितानी दूतावास के नौ लोगों को हिरासत में ले लिया गया था. ब्रिटेन का कहना है कि उनमें से सात को रिहा कर दिया गया है. ईरान के इस क़दम के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज करवाने के लिए यूरोपीय संघ में शामिल देशों की सरकारें ईरानी राजदूतों को तलब कर रही हैं. यूरोपीय संघ के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि जिन ईरानी लोगों के पास ईरान का कूटनीतिक पासपोर्ट है उनका विज़ा निलंबित कर दिया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि अगर ब्रितानी दूतावास के दो लोगों को नहीं छोड़ा गया तो ईरान से यूरोपीय संघ के देशों के राजदूतों को वापस बुलाने पर भी विचार किया जा सकता है. जून में ईरान में राष्ट्रपति चुनाव के बाद वहाँ प्रदर्शनों का दौर शुरु हो गया था. आरोप था कि महमूद अहमदीनेजाद के पक्ष में मतदान के दौरान धाँधली हुई है. ईरान की सर्वोच्च विधायिका संस्था गार्डियन काउंसिल ने विवादित चुनाव नतीजों को अपनी मंज़ूरी दे दी है. ईरान लगातार ये आरोप लगा रहा है कि ब्रिटेन और अमरीका समेत कई देश चुनाव के बाद वहाँ अशांति का माहौल बनाना चाहते थे. ब्रिटेन ने इन आरोपों का खंडन किया था और अपने कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया है. इसके बाद ईरान ने दो ब्रितानी कूटनयिकों को निकाल दिया था और ब्रिटेन ने भी ऐसा ही किया था.

संबंधित समाचार