'स्वाइन फ़्लू को रोकना असंभव'

  • 4 जुलाई 2009
स्वाइन फ़्लू
Image caption विश्व स्वास्थ्य संगठन स्थिति को लेकर बहुत चिंतित है

संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य संबंधी विभाग वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन यानी डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू का फैलाव रोकना संभव नहीं है.

इस बीमारी की शुरूआत दक्षिण अमरीकी देश मैक्सिको से हुई थी और वहीं एक सम्मलेन में डब्ल्यूएचओ के निदेशक ने यह भयावह बात कही है. स्वाइन फ्लू के ज़्यादातर मामलों में लोग दोबारा स्वस्थ हो रहे हैं लेकिन जिस तेज़ी से एच1एन1 वायरस फैल रहा है वही चिंता का मुख्य विषय है. इसके अलावा एक डर ये भी है कि वायरस कभी भी अपना रुप बदलकर अधिक घातक बन सकता है. स्वाइन फ्लू के शुरूआती मामले अब से करीब दो महीने पहले मैक्सिको में सामने आए थे. तब से अब तक लगभग 100 देशों में इस संक्रमण ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है. 70 हज़ार लोगों को स्वाइन फ्लू का इलाज करवाना पड़ा जबकि उनमें से 300 लोगों की जान नहीं बच सकी.

इनमें से अधिकतर मामले बहुत मामूली संक्रमण के थे लेकिन अब वैज्ञानिकों को चिंता सता रही है कि जिन देशों में आजकल आम फ्लू का सीज़न चल रहा है उसके वायरस के साथ मिलकर एच1एन1 भारी तबाही फैला सकता है.

हाल के दिनों में दक्षिणी अमरीकी देशों, चिली से 15 और अर्जेंटीना से 26 मौतों की ख़बर आने से यह चिंता और गहरी हो गई है.

ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अगले महीने के अंत तक देश में स्वाइन फ्लू संक्रमण के मामले एक लाख तक पहुँच सकते हैं. स्वाइन फ्लू को लेकर बेचैनी इतनी बढ़ गई है कि लोग इंटरनेट पर स्वाइन फ्लू की दवा टैमीफ्लू ख़रीद रहे हैं, ब्रितानी फार्मास्युटिकल सोसाइटी के डेविड प्रुस का कहना है कि इंटरनेट पर टैमीफ्लू की दवाओं के विज्ञापनों की संख्या नपुंसकता दूर करने वाली गोली वायग्रा से भी आगे बढ़ गई है. डॉक्टरों का कहना है कि इस समय वायरस इतना कमज़ोर है कि ज्यादातर लोग बिना किसी दवा के उससे उबर जाते हैं. वैसे अगले महीने तक स्वाइन फ्लू का टीका भी उपलब्ध हो सकता है लेकिन अभी उसका परीक्षण किया जाना बाक़ी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे अधिक यही चिंता सता रही है कि वायरस कहीं अपना रुप बदलकर ज्यादा ख़तरनाक न हो जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू के सभी वायरसों की तरह एच1एन1 में भी रूप बदलकर वैज्ञानिकों को चौंकाने की अपार क्षमता है.

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