जी-8: आतंकवाद के ख़िलाफ़ घोषणापत्र मंज़ूर

ओबामा- मनमोहन
Image caption ओबामा और मनमोहन सिंह इससे पहले लंदन में मिले थे

इटली के ला-अक़िला शहर में धनी देशों के संगठन (जी-8) देशों की बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच संक्षिप्त मुलाक़ात हुई.

दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाए और थोड़ी देर तक बातचीत की.

इसी बैठक में आतंकवाद के विरुद्ध घोषणापत्र को मंज़ूर किया गया जिसमें कहा गया है कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और स्थायित्व के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. इससे पहले अप्रैल में लंदन में जी-20 देशों की बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत हुई थी.

जी-8 के नेताओं ने स्वीकार किया कि मादक पदार्थों की तस्करी, ग़रीबी और असमान आर्थिक विकास के कारण आतंकवाद का बल मिलता है.

जी-8 के साथ-साथ भारत, ब्राज़ील, चीन, मैक्सिको, मिस्र और दक्षिण अफ़्रीका के नेताओं की अलग से बैठक हुई. इसमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को मज़बूत बनाने पर ज़ोर दिया गया.

जी-8 की बैठक में जलावुय परिवर्तन का मुद्दा छाया रहा लेकिन वैश्विक आर्थिक सुस्ती, आतंकवाद और ग़रीब देशों की सहायता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है.

भारत ने आर्थिक सुस्ती पर विकसित देशों के रवैये की आलोचना की है. भारतीय विदेश सचिव शिव शंकर मेनन ने स्पष्ट कहा, "विकसित देश अपने उद्योग- धंधों को संरक्षण दे रहे हैं. संरक्षणवाद ख़तरनाक साबित हो सकता है."

ग़ौरतलब है कि आर्थिक सुस्ती के दौर में भारत से निर्यात में भारी गिरावट आई है और इसके लिए कुछ हद तक विकसित देशों की सरंक्षणवादी नीति को भी ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इटली रवाना होने से पहले कहा था कि वो इस मुद्दे पर विकसित देशों के समक्ष भारत का रुख़ स्पष्ट करेंगे.

जलवायु परिवर्तन पर सहमति

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि धनी और विकासशील देशों के बीच जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ऐतिहासिक सहमति बन गई है.

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों में सहमति बनी है कि वे ग्लोबल वार्मिंग को अधिकतम दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए प्रयास करेंगे.

हालाँकि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून के औद्योगिक देशों की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्होंने घातक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि भारत और चीन भी उत्सर्जन में कमी करने पर सहमत हो गए हैं, इस लिहाज़ से ये बड़ी सफलता है.

लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ आरके पचौरी का कहना है कि जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, वे स्पष्ट नहीं हैं.

संबंधित समाचार