बिजली चोरी के ख़िलाफ़ फ़तवा

  • 14 जुलाई 2009
बिजली
Image caption पाकिस्तान का अधिकतर हिस्सा बिजली की कमी से जूझ रहा है

पाकिस्तान में 12 वरिष्ठ मुस्लिम विद्वानों ने बिजली की चोरी को अपराध बताते हुए इसके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया है.

कराची इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (केईएससी) ने बिजली की चोरी की घटनाओं से तंग आकर उलेमा का सहारा लिया.

कंपनी के एक आकलन के मुताबिक बिजली चोरी से उसे एक अरब रुपए का घाटा हो रहा था.

कंपनी का कहना था कि लोगों को ये समझना चाहिए कि किसी किसी भी चीज़ की चोरी की तरह बिजली चुराना भी ग़ैर क़ानूनी और अनैतिक है.

कराची में कई लोग घर के पास से गुजर रहे बिजली की लाइन से अवैध तरीके से अपने घरों में बिजली आपूर्ति करते हैं या फिर अपने मीटर से छेड़छाड़ करते हैं जिससे बिजली देने वाली कंपनी को राजस्व का घाटा होता है.

अब 12 वरिष्ठ मुस्लिम विद्वानों ने एक साथ इस्लामी क़ानून शरिया का हवाला का देते हुए कहा है कि किसी भी चीज़ का बगैर अनुमति इस्तेमाल करना या उससे फ़ायदा उठाना चोरी है जो पाप की श्रेणी में आता है.

उनका कहना है कि चोरों के ख़िलाफ़ क़ानूनी क़दम उठाना इस्लाम के मुताबिक जायज़ है.

यही नहीं इन विद्वानों ने लोगों से कहा है कि उन्होंने जितनी बिजली चुराई है उसकी भरपाई के लिए वे उचित रकम अदा करें.

कंपनी के पास बिजली चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ ज़ुर्माना लगाने का अधिकार पहले से ही है.

पाकिस्तान का अधिकतर हिस्सा बिजली की कमी से जूझ रहा है. इसका मुख्य कारण माँग में वृद्धि, बुनियादी संरचना में निवेश की कमी और बिजली की चोरी है.

कराची की आबादी लगभग डेढ़ करोड़ है और इसे पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कहा जाता है. पिछले शनिवार को शहर में बिजली की आपूर्ति ठप होने के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर उतर आए थे.

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