शंघाई में दूसरी संतान की अनुमति

चीनी बच्चा
Image caption चीन में शेंघाई को राजनीतिक परिवर्तनों की प्रयोगशाला माना जाता है

चीन की सरकार ने महानगर शंघाई में 'एक संतान' की नीति में परिवर्तन करके दूसरे संतान की अनुमति दे दी है.

चीन अपनी जिन नीतियों को अपनी बड़ी कामयाबी मानता है उनमें जनसंख्या नियंत्रण की नीति सबसे ऊपर है. सिर्फ़ दो पीढ़ियों में उसकी जनसंख्या वृद्धि दर प्रति महिला एक दशमलव सात तक पहुँच गई, यानी हम दो हमारे पौने दो. इसका मतलब ये हुआ कि देश की जनसंख्या में कमी आने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. चीन में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है, उनकी आबादी में 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या दस प्रतिशत तक पहुँच गई है. आने वाले दशकों में चीन में बुज़ुर्गों की संख्या में तिगुनी बढ़ोतरी हो जाएगी. जिन लोगों की सिर्फ़ एक संतान है उनके लिए एक बड़ी समस्या ये भी है कि बुढ़ापे में आर्थिक और सामाजिक स्तर पर उनकी देखभाल के लिए अधिक विकल्प नहीं रहते. आबादी की बढ़ती उम्र के कारण कामगारों की कमी और बुजुर्गों की बुरी हालत की वजह से चीन सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा है. चीन की एक संतान नीति के तहत सिर्फ़ उसी दंपत्ति के एक से अधिक संतान हो सकती है जिसमें पति-पत्नी दोनों के कोई भाई-बहन न हों. चीन के ग्रामीण इलाक़ों में उन्हीं लोगों को दूसरे संतान की अनुमति है जिनके पहली संतान बालिका है.

राजनीतिक परिवर्तनों की प्रयोगशाला

चीन के सबसे बड़े महानगर और व्यावसायिक राजधानी होने के कारण शंघाई को युवा कामगारों की ज़रूरत है. अभी स्पष्ट नहीं है कि चीन के अन्य हिस्से भी एक संतान की नीति में बदलाव करेंगे या नहीं.

वैसे औद्योगिक उत्पादन के लिए मशहूर ग्वांदोंग प्रांत ने साफ़ कह दिया है कि उसका नीति में बदलाव का कोई इरादा नहीं है.

शंघाई चीन में राजनीतिक परिवर्तनों की प्रयोगशाला रही है, अक्सर ऐसा होता है कि जो नीतियाँ पहले महानगर शंघाई में लागू की जाती हैं वे बाद में पूरे देश में अमल में लाई जाती हैं.

ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि ऐसे लोग जो दूसरी संतान चाहते हैं वे शंघाई का रुख़ करने के बारे में सोच सकते हैं.