भारत परमाणु पनडुब्बी क्लब में शामिल

  • 26 जुलाई 2009
फ़ाइल फ़ोटो
Image caption रूस से खरीदी गई ये पनडुब्बी अब संग्रहालय की शोभा बढ़ा रही है.

लगभग पच्चीस साल की कोशिशों के बाद आखिरकर रविवार को भारत परमाणु पनडुब्बियों वाले अतिविशिष्ट क्लब में प्रवेश कर गया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने औपचारिक तौर पर अरिहंत, यानि दुश्मन का खात्मा करनेवाला, नामके इस परमाणु ताक़त से लैस पनडुब्बी को विशाखापतनम में नौसेना के हवाले कर दिया.

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये पनडुब्बी भारत में ही डिजाइन की गई है और यहीं बनी भी है.

दुनिया में केवल अमरीका, रूस, चीन, फ़्रांस और ब्रिटेन ऐसे देश हैं जिनके पास परमाणु पनडुब्बी है.

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि फ़िलहाल ये पनडुब्बी पानी में तो उतार दी गई है लेकिन इसके पूरी तरह से कार्यरत होने में कम से कम दो साल का समय और लगेगा.

इस पनडुब्बी का निर्माण काफ़ी गुप्त तरीके से हो रहा था और भारत सरकार ने दो दशकों के इस कार्यक्रम के बाद पहली बार इस साल की शुरूआत में इस जानकारी को सार्वजनिक किया.

जानकारों का कहना है कि इस पनडुब्बी की ख़ासियत ये है कि ये महीनों तक गहरे समुद्र के अंदर रह सकती है जबकी आमतौर पर डिजल चालित पनडुब्बियों को रीचार्ज करने के लिए सतह पर आने की ज़रूरत होती है.

भारत ने एलान कर रखा है कि वो कभी भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल में पहल नहीं करेगा.

ऐसे में यदि कोई देश भारत पर पहले परमाणु हमला करता है और तबाही मचाता है तो ये पनडुब्बी पलटकर परमाणु हमला करने की ताक़त रखता है.