नाइजीरिया में इस्लामी चरमपंथियों के हमले

नाइजीरिया
Image caption उत्तरी नाइजीरिया में जातीय, धार्मिक और सांस्कृतिक विवादों का इतिहास रहा है

उत्तरी नाइजीरिया में सरकारी इमारतों पर इस्लामी चरमपंथियों के सुनियोजित हमलों में लगभग सौ लोग मारे गए हैं.

शुक्रवार को चरमपंथी नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद चार मुस्लिम बाहुल्य राज्यों में हिंसक घटनाएं हुईं.

ऐसी ख़बरें मिली हैं कि पुलिस स्टेशन के बाहर शव पड़े हुए हैं और कई आम नागरिकों को कारों से निकालकर गोली मारी दी गई.

चरमपंथी नाइजीरिया में पश्चिमी देशों के असर का विरोध कर रहे हैं.

नाइजीरिया में बीबीसी के संवाददाता ने अपनी आँखों से 100 से ज्यादा लाशें देखी हैं, सबसे बड़े पैमाने पर हिंसा बोरनो प्रांत में हुई जहाँ से सैकड़ों लोग अपने घर बार छोड़कर भाग रहे हैं. एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया कि बाउची में एक पुलिस स्टेशन के बाहर लाशों का ढेर दिखाई दे रहा है. सरकारी दफ़्तरों पर हमला करने वाले इस्लामी चरमपंथी एक ऐसे धर्मगुरु मोहम्मद युसूफ़ के अनुयायी बताए जाते हैं जो वर्षों से अँगेज़ी़ स्कूलों के ख़िलाफ़ अभियान चलाते रहे हैं, वे इन स्कूलों को इस्लाम विरोधी बताते हैं. बाउची के लोगों का कहना है कि मोहम्मद यूसुफ़ का संगठन अब तक कोई बड़ा संगठन नहीं माना जाता था लेकिन पिछले कुछ समय से उसमें बड़ी संख्या में नौजवान शामिल हुए थे.

टकराव

उत्तरी नाइजीरिया को विशेष तौर पर संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है जहाँ जातीय, धार्मिक और सांस्कृतिक विवादों का इतिहास रहा है और संसाधनों की कमी की वजह से अलग-अलग गुट अक्सर आपस में उलझते रहते हैं. लेकिन इस बार जो हिंसा हुई है वह दो समुदायों के बीच नहीं हैं बल्कि इसमें एक धार्मिक गुट के हथियारबंद युवाओं ने हिंसक अभियान छेड़ दिया और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया. नाइजीरिया में ऐसे कुछ छोटे-मोटे इस्लामी गुट हैं जो तालेबान से जुड़े होने का दावा करते हैं और कई ऐसे लोग भी हैं जिन पर अल क़ायदा से ताल्लुक रखने के आरोप हैं. नाइजीरिया अफ्रीका के सोमालिया जैसे देशों की श्रेणी में नहीं है जहाँ इस्लामी चरमपंथी इतने मज़बूत हों कि सरकार को सीधी चुनौती दे सकें. उत्तरी नाइजीरिया की एक ख़ास बात ये है कि वहाँ इस्लामी शरिया कानून लागू है लेकिन वहाँ इस्लामी चरमपंथ का कोई इतिहास नहीं रहा है. नाइजीरिया की कुल आबादी पंद्रह करोड़ के करीब है और आबादी में ईसाइयों और मुसलमानों का अनुपात लगभग बराबर-बराबर है.

दोनों समुदाय आम तौर पर शांतिपूर्वक साथ-साथ रहते हैं लेकिन कई बार उनके बीच सांप्रदायिक तनाव की स्थिति भी पैदा हो जाती है.

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