बम धमाकों से थर्राया इराक़

  • 10 अगस्त 2009
इराक़
Image caption इराक़ में तीन दिनों के दौरान शिया समुदाय पर यह दूसरा बड़ा हमले वाला दिन है

इराक़ में सोमवार की शुरुआत ही दहला देने वाली हुई और एक बार फिर से देश की सुरक्षा का सवाल और चरमपंथ से निपटने की इराक़ सरकार की कोशिशों पर सवाल खड़ा होता नज़र आ रहा है. इराक़ में सोमवार को एक के बाद एक करके चार बम धमाके हुए हैं जिनमें कम से कम 41 लोगों के मारे जाने की ख़बरें आ रही हैं. बताया जा रहा है कि कम से कम डेढ़ सौ लोग इन धमाकों में घायल हो गए हैं. सोमवार को हुए चार धमाकों में से दो मूसल शहर के पास हुए हैं और बाकी के दो राजधानी बग़दाद के पास हुए हैं. चारों धमाकों की जगहें अलग-अलग थीं पर चारों धमाकों में समानता भी देखने को मिल रही है. मसलन, चारों धमाकों के लिए कार बमों का इस्तेमाल किया गया है और ये सभी धमाके लगभग एक ही समय के आसपास हुए हैं.

सुरक्षा का सवाल इन तथ्यों के आधार पर आकलन किया जा रहा है कि शायद इस धमाकों को एक तय और सुनियोजित तरीके से किया गया है. मूसल के पास जो धमाके हुए हैं उनमें शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है. वहीं राजधानी बग़दाद में हुए धमाके दो निर्माण कार्यस्थलों के पास हुए हैं. इन धमाकों से दो दिन पहले ही पूरा इराक़ सिलसिलेवार धमाकों से गूंज उठा था और 40 से ज़्यादा शिया समुदाय के लोग इनका निशाना बने थे.

हाल ही में इराक़ के प्रमुख शहरों से अमरीकी सेना की वापसी हुई है. वर्ष 2010 तक लक्ष्य रखा गया था कि इराक़ से अन्य इलाकों में तैनात अमरीकी सैनिकों को भी वापस बुला लिया जाएगा.

हालांकि यह सवाल भी उठा था कि क्या अमरीकी सैनिकों की वापसी के बाद इराक़ अंदरूनी सुरक्षा के सवाल से अपने बल पर निपट सकेगा.

पिछले एक सप्ताह के दौरान हुए हमलों ने इसपर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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