ग़ज़ा में संघर्ष,16 की मौत

  • 15 अगस्त 2009

ग़ज़ा पट्टी में अल क़ायदा का समर्थक करने वाले इस्लामिक चरमपंथियों और हमास के बंदूकधारियों के बीच भीषण लड़ाई में कम से कम 16 लोग मारे गए हैं और 120 से अधिक घायल हैं.

लड़ाई का केंद्र ग़ज़ा और मिस्र की सीमा के पास बसे रफ़ाह शहर की एक मस्जिद है. इस मस्जिद के आस पास के पूरे इलाक़े को सील कर दिया गया है.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमास के सैकड़ों पुलिसकर्मियों और उसके सैन्य धड़े के नक़ाबपोश लड़ाकों ने इस मस्जिद को घेर रखा है और उस पर गोलीबारी कर रहे हैं और हथगोले फेंक रहे हैं.

समझा जा रहा है कि जुंद अंसार अल्लाह नाम के एक जिहादी संगठन के कोई दो दर्जन समर्थक मस्जिद के अंदर मौजूद हैं.

जुमे की नमाज़ के समय मस्जिद में आए सैकड़ों नमाज़ियों ने ग़ज़ा को इस्लामिक अमीरात घोषित किया. जुंद अंसार अल्लाह संगठन के नेता और मस्जिद के इमाम अब्दुल लतीफ़ मूसा ने जब यह घोषणा की तो चार नक़ाबपोश लड़ाके राइफ़लें लिए उनके चारों ओर तैनात थे.इमाम ने कहा,“हम घोषणा करते हैं एक नए जन्म की, एक इस्लामिक अमीरात के जन्म की”.

हमास के साथ संघर्ष

अब्दुल लतीफ़ मूसा और उनके हथियारबंद समर्थकों ने कहा कि वो मरते दम तक लड़ेंगे लेकिन मस्जिद पर हमास का क़ब्ज़ा नहीं होने देंगे.

लेकिन हमास के नेता इस्माइल हानिया ने मूसा की घोषणा का खंडन करते हुए कहा, “इस्लामिक अमीरात की घोषणा ग़ज़ा पट्टी के ख़िलाफ़ उत्तेजना फैलाने के लिए की गई है जिससे ग़ज़ा के ख़िलाफ़ एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन तैयार किया जा सके. हम उन लोगों को चेतावनी दे रहे हैं जिनका इस घोषणा के पीछे हाथ है”.

जुंद अंसार अल्लाह का नाम दो महीने पहले तब ख़बरों में आया था जब उन्होने ग़ज़ा और इसराइल के बीच की एक सीमा चौकी पर विफल हमला किया था.

ग़ज़ा पट्टी का प्रशासन हमास के हाथों में है लेकिन यह संगठन हमास की कड़ी आलोचना करता है. उसका आरोप है कि हमास पूरी तरह से इस्लामिक संगठन नहीं है.

हमास ने इससे पहले भी अल क़ायदा से प्रेरित संगठनों के साथ सख़्ती बरती है. उसे चिंता है कि कहीं हमास के कुछ अतिवादी सदस्य इन संगठनों से न जा मिलें. हमास के सुरक्षा बलों के अलावा ग़ज़ा में किसी को भी हथियार रखने की इजाज़त नहीं है.

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