ख़मेनेई को पूर्व सांसदों की चुनौती

आयतुल्लाह अली ख़ामनेइ
Image caption विश्लेषकों का मानना है कि पत्र ख़ामनेई को सीधी चुनौती है

ईरान के कुछ पूर्व सांसदों के गुट ने सर्वोच्च धार्मिक पैनल के सामने प्रश्न रखा है कि क्या सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़मेनेई राज करने के क़ाबिल हैं.

ये सवाल विशेषज्ञों की असेंबली के सामने उठाया गया जो ईरानी क़ानून के मुताबिक़ सर्वोच्च नेता को हटा सकती है.

इस पत्र में जून के विवादित चुनाव के बाद हुए प्रदर्शन के विरुद्ध कारवाई और मुक़दमों की आलोचना की गई है.

इस बीच एक वरिष्ठ धार्मिक नेता ने कहा है कि एक सुधारवादी नेता के ख़िलाफ़ इस बात के लिए मुक़दमा चलाया जाना चाहिए कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ बलात्कार होने का इल्ज़ाम लगाया है.

अयातुल्ला अहमद ख़ातमी ने कहा है कि पराजित उम्मीदवार महदी करौबी के बयान ने ईरान के दुश्मनों, ख़ास तौर से अमरीका और इसराइल के हौसले बढ़ाए हैं.

महदी करौबी ने आरोप लगाया है कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों में से कुछ महिलाओं और कुछ पुरूषों के साथ बलात्कार हुआ है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों को यातना देकर मार डाला गया.

अधिकारियों ने बलात्कार के इल्ज़ाम को नकार दिया है लेकिन ये स्वीकार किया है कि दुर्व्यवहार हुआ है.

तेहरान में अपने जुमे के भाषण में अयातुल्ला ख़ातमी ने कहा कि करौबी के दावे को बारे कहा था कि ये "मान-हानि से भरा पड़ा है और इस्लामी व्यवस्था के विरुद्ध अपमान हैं." उन्होंने उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे की मांग की.

अयातुल्ला ख़ातमी ने कहा, "हमें इस्लामी व्यवस्था से ये उम्मीद है कि वह इस पर मुनासिब कार्रवाई करेगी."

ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक अपने पहले के बयान में उन्होंने कहा था, "अगर कोई व्यवस्था पर इल्ज़ाम लगाता है कि जेल में बलात्कार हुआ है तो वो व्यक्ति आरोप को या तो साबित करे और वह अगर ऐसा नहीं कर पाता तो व्यवस्था को उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाना चाहिए."

पूर्व सांसदों के पत्र

विपक्ष की कई वेबसाइटों पर पूर्व सांसदों का पत्र प्रकाशित हुआ हैं. इस रिपोर्ट में किसी का नाम नहीं दिया गया है और न ही यह बताया गया है कि कितने लोगों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.

यह पत्र पूर्व राष्ट्रपति अली अकबर रफ़सनजानी को लिखा गया है जो विशेषज्ञों की असेंबली के अध्यक्ष हैं. इसमें ईरानी संविधान की धारा 111 के तहत क़ानूनी जांच की मांग की गई है जो कि असेंबली की ज़िम्मदारी है.

इस धारा के तहत अगर सर्वोच्च नेता अपने काम को भलिभांति अंजाम देने में असमर्थ है तो उन्हें हटाने का प्रावधान है.

इस पत्र में तेहरान में पकड़े गए प्रदर्शनकारियों के ट्रायल को "स्टॉलिन की अदालत" से तुलना करते हुए उसकी निंदा की गई.

इसमें ये भी कहा गया कि तेहरान के पास स्थित कहरिज़क जेल जहाँ कथित दुर्व्यवहार की ज़्यादातर घटना हुई वह इराक़ के अमरीकी जेल अबू गरेब और क्यूबा के ग्वांतानामो बे से भी ज़्यादा ख़राब है.

अभी तक असेंबली की ओर से उस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.