लॉकरबी मामले में स्कॉटलैंड की निंदा

रॉबर्ट मुलर
Image caption मुलर ने मगराही की रिहाई के लिए स्कॉटलैंड के न्याय मंत्री की तीखी आलोचना की

अमरीकी संघीय जाँच एजेंसी एफ़बीआई के प्रमुख रॉबर्ट मुलर ने लॉकरबी बम हमला मामले में सज़ायाफ़्ता लीबियाई नागरिक अब्दुल बासित अल-मगराही की रिहाई के लिए स्कॉटलैंड सरकार की कड़ी आलोचना की है.

वर्ष1988 में स्कटॉलैंड में लॉकरबी के आसमान में एक अमरीकी यात्री विमान में हुए धमाके में 270 लोग मारे गए थे. इस मामले में सिर्फ़ मगराही को ही सज़ा मिली थी.

पिछले दिनों स्कॉटलैंड के न्याय मंत्री केनी मैकएस्किल ने मगराही को मानवीय आधार पर रिहा कर दिया था.

मैकएस्किल को लिखे पत्र में मुलर ने कहा है कि मगराही की रिहाई से न्याय-व्यवस्था का मज़ाक बना है और इससे दुनिया भर के आतंकवादियों को राहत मिली होगी.

एफ़बीआई निदेशक ने मैकएस्किल को पत्र में लिखा, "आपके फ़ैसले से दुनिया भर के आतंकवादियों को सुकून मिला होगा. अब उन्हें विश्वास हो गया होगा कि चाहे जितनी बढ़िया जाँच हुई हो, सारी तय प्रक्रियाओं से गुज़रने के बाद जूरी का जो भी फ़ैसला हो, अपराध के अनुरूप जो भी सज़ा दी गई हो, मात्र एक व्यक्ति की 'करुणा' से कोई आतंकवादी रिहा हो जाएगा."

मुलर का 21 अगस्त का पत्र दो दशक पहले लॉकरबी बम हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को भी भेजा गया है.

रॉबर्ट मुलर ने अमरीका के न्याय विभाग में वकील रहने के दौरान लॉकरबी विमान बम काँड की जाँच में प्रमुख भूमिका निभाई थी.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी मगराही को स्कॉटलैंड की जेल से छोड़े जाने की आलोचना कर चुके हैं.

गद्दाफ़ी ने शुक्रिया कहा

इससे पहले लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने लॉकरबी बम कांड के दोषी लीबियाई को रिहा कराए जाने के मामले में ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन की तारीफ़ की है.

Image caption रिहाई के बाद लीबिया पहुँचने पर मगराही का नायकों जैसा स्वागत हुआ

गद्दाफ़ी ने कहा कि ब्राउन ने स्कॉटलैंड के अधिकारियों को अब्दुल बासिद अल-मगराही को रिहा करने के लिए प्रेरित किया.

इस बीच गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ ने इस बात के संकेत दिए हैं कि मगराही की रिहाई को ब्रिटेन से बढ़ते व्यापारिक संबंधों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए.

मगराही को संबोधित करते हुए सैफ़ गद्दाफ़ी ने कहा, "असल में व्यापार, तेल और गैस समेत हर तरह के सौदों में जब-जब मेरा ब्रिटेन से संपर्क हुआ, आपका मामला हमेशा ही बातचीत का विषय रहा. इसी तरह जब भी लीबिया में ब्रितानी हितों की बात हुई, मैंने आपकी बात की."

लेकिन ब्रिटेन ने इस बात से इनकार किया है कि मगराही की रिहाई किसी भी तरह से लीबिया-ब्रिटेन व्यापारिक संबंधों से जुड़ी हुई है.

हालांकि गद्दाफी के बेटे लीबिया की सरकार में किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन उनके चैरिटी फाउंडेशन ने पश्चिमी देशों के साथ लीबिया के संबंध सुधारने में रचनात्मक भूमिका निभाई है.

साथ ही लीबिया में सुधारवादी मार्ग पर लाने की दिशा में काम किया है.

लेकिन अब उनके चैरिटी फाउंडेशन ने इस ख़बर का खंडन किया है.

चैरिटी फाउंडेशन के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि अल-मगराही की रिहाई के लिए ब्रिटेन की सरकार के साथ कोई सौदा नहीं हुआ है.

चैरिटी फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक डॉ युसूफ़ सर्वानी ने बीबीसी को बताया कि अल-इसलाम गद्दाफी के वक्तव्य को गलत संदर्भ और अर्थ में पेश किया गया है.

डॉक्टर सर्वानी का कहना था,“अल मगराही की रिहाई के पीछे मानवीयता के अलावा और कोई हित नहीं था. मैं यह साफ़ बता देना चाहता हूँ कि सैफ़ गद्दाफ़ी ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक संबंधों का ज़िक्र कर रहे थे. अल-मगराही को मानवीय आधार पर रिहा किए जाने का फैसला स्कॉट्लैंड की सरकार का था.”

डॉ सर्वानी ने जोर देकर यह भी कहा कि घर वापसी पर अल मगराही का स्वागत एक हीरो की तरह नहीं किया गया था.

हालाँकि अमरीका और ब्रिटेन ने लीबिया से इस तरह के किसी आयोजन से बचने को कहा था ताकि लॉकरबी बम हमले में मारे गए लोगों के परिजनों की संवेदनाओं को ठेस नहीं पहुँचे.

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