मृत क़ैदियों पर कम होगी निर्भरता

चीन में मृ्त्युदंड
Image caption चीन में मृत्युदंड के बाद अंग प्रतिरोपण के लिए शवों का इस्तमाल

चीन सरकार का कहना है कि अंग प्रतिरोपण के लिए ऐसे क़ैदियों पर निर्भरता कम की जाएगी जिन्हें मृत्युदंड की सज़ा दी जा चुकी है.

चीन के अख़बार चाइना डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौत की सज़ा पा चुके क़ैदी फ़िलहाल देश में अंग प्रतिरोपण की दो तिहाई ज़रूरत को पूरा करते हैं.

किसी अज्ञात विशेषज्ञ के हवाले से चाइना डेली में ये कहा गया है कि प्रतिरोपण के लिए इस्तेमाल होने वाले 65 प्रतिशत अंग, उन क़ैदियों के शवों से लिए जाते हैं जिन्हें मृत्युदंड दिया जा चुका है.

चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में हर साल लगभग 15 लाख लोगों को अंग प्रतिरोपण की ज़रूरत होती है, जबकि केवल 10 हज़ार लोगों की ही ज़रूरत पूरी हो पाती है.

चीन सरकार अब एक ऐसी योजना बना रही है, जिसके तहत क़ैदी के पास ये विकल्प होगा कि वो स्वेच्छा से किसी को अंगदान कर सकता है. इस नई योजना का उद्देश्य मारे जा चुके क़ैदियों के अंगों पर निर्भरता को कम करना तो है ही, साथ ही मानव अंगों की तस्करी पर रोक लगाना भी है.

अंग दान

मानवीय अंगों की कालाबाज़ारी रोकने के लिए चीन सरकार ने सन 2007 में एक क़ानून बनाया था जिसके अंतर्गत मानव अंगों की तस्करी, और अनजान लोगों के लिए स्वेच्छा से अंगदान करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

चीन में प्रतिरोपण के लिए उपलब्ध अंगों की कमी के कारण मानवीय अंगों की कालाबाज़ारी और ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से अंग दान का सिलसिला कभी थमा ही नहीं. स्वास्थ्य मंत्रालय और मीडिया के मुतबिक़ ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से अंगदान का सिलसिला जारी रहा. कई बार तो जीवित लोगों को भी अंगदान करते पाया गया.

मानवाधिकार संगठनों ने कई बार चीन मे अंगदान की प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन ये सवाल उन कैदियों के अंगों के इस्तमाल को लेकर उठाए गए, जिन्हें मौत की सज़ा दी जा चुकी थी.

चीन में क़ैदियों को मौत की सज़ा देने के मामले दुनिया के सभी देशों के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा देखने में आते हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक सन 2008 में चीन में 1718 लोगों को मौत की सज़ा दी गई.

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