राजस्थान भाजपा में गतिरोध जारी

  • 27 अगस्त 2009
वसुंधरा राजे
Image caption वसुंधरा राजे विपक्ष के नेता का पद नहीं छोड़ना चाहती हैं

राजस्थान में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी में नेता पद को लेकर बना गतिरोध अभी दूर नहीं हुआ है और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्रीय नेतृत्व में पटरी नहीं बैठ पा रही है.

पार्टी हाईकमान ने वसुंधरा राजे को नेता पद छोड़ने का निर्देश दे रखा है मगर राजे अब भी अपने पद पर बनी हुई हैं.

इस बीच वसुंधरा राजे ने बुधवार को विधायक दल बैठक की अध्यक्षता की.

कहने को ये बैठक गुरुवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र की तैयारी के लिए बुलाई गई थी, मगर प्रेक्षक मानते हैं कि बैठक बुलाना अपनी ताकत दिखाने का ही एक तरीका था.

भाजपा ने इस बैठक में विधानसभा सत्र के बॉयकॉट का निर्णय लिया. भाजपा का कहना है कि उसके तीन विधायक सदन से निलंबित हैं, लिहाजा वो सत्र का बहिष्कार करेंगे.

बैठक में रणनीति

पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा राजे को इस बैठक को आयोजित करने की अनुमति दे दी थी, हालांकि पार्टी ने राज्य में ख़राब चुनावी प्रदर्शन के बाद वसुंधरा राजे को अपना पद छोड़ने को कहा था. मगर राजे ने इसे स्वीकार नहीं किया.

पहले वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों ने दिल्ली जाकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया. फिर राजे भी रोड शो करते हुए दिल्ली गईं. मगर जब वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला तो वो जयपुर वापस लौट आईं.

विधायक दल की बैठक में कुल 78 विधायकों में से 70 विधायक मौजूद थे. लेकिन पार्टी के आंतरिक मसलों पर कोई चर्चा नहीं हुई.

बैठक के बाद विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवारी ने कहा कि ये बैठक सत्र के लिए रणनीति को लेकर बुलाई गई थी. बैठक में विधायकों ने कहा कि सत्ता पक्ष ने उनके तीन साथी विधायकों को निलंबित करवा दिया और इसके विरोध में वो पूरे सत्र का बॉयकाट करेंगे.

उनका कहना था कि ये बॉयकाट तब तक जारी रहेगा जब तक पार्टी के तीन विधायकों की बहाली नहीं हो जाती. वसुंधरा राजे ने इस पर मीडिया से कोई बात नहीं की.

वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों ने अब हाईकमान का कड़ा रुख देखते हुए चुप्पी साध रखी है. यूँ तो ऐसी बैठक होना आम बात है, मगर भाजपा में जारी घमासान के सबब इस बैठक का सियासी महत्व बढ़ गया था.

विधायक दल की बैठक में राज्य पार्टी के अध्यक्ष भी मौजूद रहते हैं, मगर पार्टी अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी इस बैठक से दूर ही थे.

प्रेक्षक मानते है अरुण चतुर्वेदी की ग़ैरहाजिरी पार्टी संगठन और वसुंधरा राजे के बीच बढ़ती दूरियों को रेखांकित करती है. बहरहाल एक तरफ जहाँ वसुंधरा राजे और उनके समर्थक खामोश है, पार्टी संगठन ने भी मौन धारण कर रखा है.

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