कोरिया परिवारों का फिर से मिलन

  • 28 अगस्त 2009
कोरियाई नेता
Image caption यह समझौता दोनों देशों के बीच तनाव हल्का होने का संकेत देता है.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया ने बिछड़े परिवारों का फिर से मिलन कराने का कार्यक्रम फिर से शुरू करने का फ़ैसला किया है जिसे दो साल पहले उत्तर कोरिया ने रोक दिया था.

परिवारों का मिलन कार्यक्रम मूल रूप से वर्ष 2000 में शुरू हुआ था लेकिन दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की वजह से यह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था.

इस परिवार मिलन कार्यक्रम को फिर से शुरू करने पर बीते सप्ताह ही बातचीत शुरू हुई थी. दरअसल वर्ष 1950-53 के दौरान जब कोरिया युद्ध के बाद विभाजन हुआ था तब हज़ारों परिवारों का भी विभाजन हो गया था.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि अब इन परिवारों को सितंबर में फिर से मिलने का अवसर दिया जाएगा.

यह समझौता इस बात का संकेत है कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव अब कुछ कम हो रहा है.

दोनों देशों में मौजूद रैडक्रॉस अधिकारियों के बीच तीन दिन की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है. यह बातचीत उत्तर कोरिया के माउंट कुमगांग पर्यटन स्थल पर हुई जहाँ 26 सितंबर से एक अक्तूबर तक परिवारों का फिर से मिलन कराया जाएगा.

परिवारों को कुछ दिन के लिए एक साथ ठहरने का अवसर दिया जाएगा, वे परिजनों के साथ कुछ समय गुज़ार सकेंगे, खाना खाएंगे और फिर अपने घरों को वापस लौट जाएंगे.

सियोल में बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि कोरियाई युद्ध में हज़ारों परिवार बिछड़े थे और पुनर्मिलन कार्यक्रम में जिन परिवारों को यह मौक़ा दिया जा रहा है वह बहुत छोटी सी संख्या है.

संवाददाता के अनुसार बहुत से परिवारों के लिए तो समय का पहिया तीव्र गति से भाग रहा है और वे उम्मीद लगाए हुए हैं कि उनके जीवन में बिछड़े सदस्यों से मिल पाएंगे या नहीं.

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया तकनीकी तौर पर अब भी युद्धरत हैं क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद कोई शांति समझौता हुआ ही नहीं.

दोनों देशों में रहने वाले लोगों के बीच अब भी कोई पत्राचार नहीं होता है, न ही टेलीफ़ोन या ईमेल संपर्क होता है और सीमा रेखा बहुत मज़बूत है.

दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने परिवारों के पुनर्मिलन पर हुई बातचीत के अवसर का इस्तेमाल अन्य मुद्दे उठाने के लिए भी किया जिनमें उन 500 मछुआरों का भी है जिनके बारे में समझा जाता है कि उन्हें पिछले कुछ दशकों के दौरान उत्तर कोरिया ने पकड़ लिया और उन्हें वापस दक्षिण कोरिया नहीं भेजा गया है.

दक्षिण कोरिया का यह भी मानना है कि उत्तर कोरिया ने उसके बहुत से लोगों को युद्ध बंदी बना रखा है लेकिन उत्तर कोरिया ने इस मुद्दे पर कोई भी बातचीत करने से इनकार कर दिया है और उसका दावा है कि वे युद्धबंदी अपनी मर्ज़ी से उत्तर कोरिया में रह रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया ने परिवारों के पुनर्मिलन और अन्य मानवीय मुद्दों पर दशक के शुरू में रेडक्रॉस के ज़रिए बातचीत हुई थी. उस दौरान लगभग 16 हज़ारों के परिजनों का फिर से मिलन कराया गया था.

Image caption दोनों कोरियाई देशों के बीच पचास के दशक से ही तनाव चला आ रहा है

लेकिन फ़रवरी 2008 में जब दक्षिण कोरिया में ली म्युंग बाक ने सत्ता की बागडोर संभाली तो परिवारों के यह पुनर्मिलन रोक दिया गया था.

कहा गया था कि बिना किसी शर्त के नियमों के तहत स्थापित सहायता शिविरों को बंद करने की ली दक्षिण कोरिया की नीति पर उत्तर कोरिया ने नाराज़गी जताई थी.

उस समय ली म्युंग बाक ने सहायता शिविरों को फिर से शुरू करने की शर्त को उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण से जोड़ दिया था. इस वर्ष यानी 2009 के आरंभ में उत्तर कोरिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच संबंध बहुत तनावपूर्ण हो गए थे.

उत्तर कोरिया ने मी 2009 में अपना दूसरा परमाणु परीक्षण किया था और अनेक बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण भी किए थे. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध और कड़े करने पर सहमत हुआ था.

अब दोनों देशों के बीच अनेक मोर्चों पर बातचीत की संभावनाएँ बन रही हैं और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इन क़दमों के ज़रिए उत्तर कोरिया की यह नीति हो सकती है कि वह प्रतिबंधों से अलग-थलग पड़ चुके अपने देश को सहायता बहाल कराने की दिशा में प्रगति कर सके.

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