'ब्रितानी मुसलमानों पर अतिरिक्त दबाव'

एक ब्रितानी मुस्लिम युवती
Image caption ब्रिटेन में मुसलमानों की संख्या कुल आबादी का तीन प्रतिशत है

ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन में कहा गया है कि लंदन धमाकों और अमरीका में हुए हमलों के बाद ब्रिटेन में बहुत सारे मुस्लिम युवाओं को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ रहा है.

पॉलिसी रिसर्च सेंटर नामक एक मुस्लिम आंदोनलकारी संस्था के इस अध्ययन में कहा गया है कि युवा मुसलमान अपने आपको बदनाम महसूस करते हैं और उन्हें दूसरे लोगों को ये समझाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है कि वे मुसलमान भी हो सकते हैं और ब्रितानी भी.

ब्रिटेन में मुसलमान देश की कुल आबादी का लगभग तीन प्रतिशत हैं. इनमें से 42 प्रतिशत लोगों का संबंध पाकिस्तान से है. आधे से अधिक लोगों की उम्र 25 वर्ष से कम है.

अध्ययन करनेवाली संस्था के अनुसार उन्होंने अपने अध्ययन में इन्हीं युवाओं की मनोदशा को सामने लाने का प्रयास किया है.

संस्था कहती है कि राष्ट्रभक्ति की मज़बूत भावना रखने के बावजूद अधिकतर युवा मुसलमानों को लगता है कि उनसे देश के लिए अपनी निष्टा को सिद्ध करने के लिए अतिरिक्त दबाव रहता है.

समस्या

अध्ययन के अनुसार लंदन और अमरीका के हमलों के अलावा आप्रवासियों को समाज की मुख्यधारा में लाने को लेकर चल रही देशव्यापी बहस के कारण मुसलमानों को अक्सर सवालों का सामना करना पड़ता है और अपनी पहचान साबित करने की चुनौती झेलनी पड़ती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि युवा मुसलमानों को रोके जाने और उनसे पूछताछ या उनकी तलाशी किया जाना भी समस्या का एक कारण है.

रिपोर्ट के अनुसार संदेह का ये वातावरण चार वर्ष पहले लंदन में हुए आत्मघाती बम धमाकों के बाद से और गंभीर होता गया है.

लंदन में बम विस्फोट करनेवाले सभी हमलावर मुसलमान थे जिनमें तीन पाकिस्तानी मूल के थे.

अध्ययन में स्थिति सुधारने के लिए जो सिफ़ारिशें की गई हैं वे शिक्षा के इर्द-गिर्द घूमती हैं जिनमें न केवल मुस्लिम आबादी के बीच शिक्षा के प्रसार की बात की गई है जिनका औसत प्रदर्शन ब्रिटेन के अन्य समुदायों के हिसाब से काफ़ी नीचे है.

साथ ही ब्रिटेन की व्यापक आबादी को भी जागरूक किए जाने का सुझाव दिया गया है ताकि वे अतीत और वर्तमान में मुसलमानों के योगदान को समझ सकें.

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