भारत का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम

Image caption ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन

भारत में वर्ष 2031 तक ग्रीनहाउस गैसों का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 2.77 से लेकर 5 टन के बीच हो जाएगा. लेकिन फिर भी यह दुनिया के प्रति व्यक्ति औसत से कम है.

भारत ने बुधवार को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से जुड़े पाँच अध्ययन जारी किए जिनमें यह बात कही गई है.

इन अध्ययनों के नतीजे की घोषणा करते हुए भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने बुधवार को कहा, "आज से दो दशक बाद भी भारत का प्रति व्यक्ति ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन दुनिया के 25 साल पहले के औसत से कम होगा".

दुनिया का प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन औसत वर्ष 2005 में 4.22 टन था जबकि भारत का औसत 1.2 टन है.

पृथ्वी के तापमान में वृद्धि

ग्रीन हाउस गैसों के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है जिससे समुद्र का जलस्तर चढ़ रहा है और सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक विपदाओं में वृद्धि हो रही है.

भारत का कहना है कि विकसित देश ख़ुद ठोस क़दम न उठाकर भारत जैसे विकासशील देशों पर इसकी ज़िम्मेदारी थोप रहे हैं.

भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस मामले में चीन से सहयोग की बात की और कहा कि जलवायु परिवर्तन को व्यापार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

जयराम रमेश ने कहा, "इसका मतलब ये नहीं है कि भारत ग्रीनहाउस गैसों के बारे में कोई कदम नहीं उठाएगा".

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन परिषद की बैठक में एनर्जी एफ़िशिएंशी सर्टिफ़िकेट के सिद्धांत पर भी बात की थी. और इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में उर्जा संरक्षण अधिनियम में संशोधन किया जाएगा.

पर्यावरण संधि ज़रूरी

क्योटो संधि की समय सीमा वर्ष 2012 में समाप्त हो रही है जिसके स्थान पर कोई दूसरी संधि होना ज़रूरी है.

दिसंबर में कोपेहेगन में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने पर महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जाएंगे और शायद भावी लक्ष्य भी निर्धारित किए जाएं. भारत और चीन लक्ष्य निर्धारण का विरोध करते हैं.

भारत और चीन जैसे विकासशील देशों पर काफ़ी दबाव पड़ने की संभावना है कि वो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए कड़े क़दम उठाएं और क़ानूनी सीमा तय करें.

शायद इसीलिए भारत की तरफ़ से ये आंकड़े जारी किए गए हैं जिससे भारत कोपेनहेगन में अपना पक्ष रख सके.

इस समय भारत विश्व के कार्बन उत्सर्जन के केवल चार प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार है जबकि अमरीका 20 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन करता है.

संबंधित समाचार