सऊदी अरब में 'शियाओं के साथ भेदभाव'

मदीना में मस्जिद
Image caption फ़रवरी में मदीना में शिया मुसलमानों का धार्मिक पुलिस के साथ संघर्ष हुआ था.

मानवाधिकारों से जुड़ी न्यूयॉर्क स्थित संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने सऊदी अरब के बारे में जारी नई रिपोर्ट में कहा है कि वहाँ इस साल सामुदायिक तनाव बढ़ा है.

इस रिपोर्ट में आरोप है कि देश के अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों के विरुद्ध सुनियोजित तरीक़े से भेदभाव हो रहा है.

ये रिपोर्ट फ़रवरी की उस घटना पर काफ़ी ध्यान केंद्रित करती है जिसमें मदीना में शिया श्रद्धालुओं का धार्मिक पुलिस के साथ संघर्ष हुआ था.

इसके बाद शिया मुसलमानों ने पूर्वी प्रान्त में काफ़ी विरोध प्रदर्शन किए. इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार भी किए गए थे.

सऊदी अरब में शिया मुसलमान कुल आबादी का 10 से 15 प्रतिशत हैं और काफ़ी समय से वे शिकायत करते रहे हैं कि उनके साथ दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह बर्ताव होता है.

इस रिपोर्ट में उन लोगों के साथ न्याय व्यवस्था, शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्र में होने वाले भेदभाव का ज़िक्र है.

विभिन्न कारक

रिपोर्ट के मुताबिक़ इसमें कुछ अंदरूनी और कुछ बाहरी कारक हैं.

देश में कट्टरपंथी सुन्नी मुसलमानों का वर्चस्व है जो वहाबी कहलाते हैं और वहाबी उलेमा शिया मुसलमानों को विधर्मी मानते हैं.

इसके साथ ही सऊदी अरब उस पूरे मध्य पूर्व के क्षेत्र में ही सामुदायिक स्तर पर बढ़ी खाई से भी प्रभावित हुआ है.

इनमें पड़ोसी इराक़ और शिया मुसलमानों के प्रभाव वाले ईरान की क्षेत्रीय भूमिका अहम रही है.

सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने यूँ तो धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने की कोशिश की है मगर ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि अभी इस दिशा में तब तक और काम करने की ज़रूरत है जब तक शिया मुसलमानों को बराबरी का दर्जा नहीं मिल जाता.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है