भूकंप में 44 लोगों की मौत

इंडोनेशिया के जावा द्वीप के पास आए ज़बरदस्त भूकंप में अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकते है.

द्वीप के पश्चिमी हिस्से में बसे तसिकमलया शहर में दर्जनों इमारतें ढह गईं है और हज़ारों लोगों को वहां से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.

बुधवार को आए भूकंप का केंद्र बंदुंग शहर के पास था जहां विश्वविद्यालय की इमारत क्षतिग्रस्त हो गई.

भूकंप को रिक्टर पैमाने पर 7.0 आंका गया. इसका झटका 200 किलोमीटर दूर राजधानी जकार्ता तक महसूस किया गया जहां सैकड़ों लोग घबरा कर सड़कों पर निकल आए.

आपात प्रबंधन एजेंसी के अधिकारी ने कहा है कि मलबे तले दबे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कि 1800 इमारतों को नुकसान पहुंचा है.

भूकंप के कारण प्रभावित इलाक़े में संपर्क लिंक टूट गए.

राहत कार्य

जॉनथन नामके एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया कि वह जकार्ता की एक इमारत की 28 वीं मंज़िल पर में था जब भूकंप आया.

उन्होंने कहा, “मैंने भागकर मीटिंग वाले कमरे की एक मेज़ के नीचे शरण ली. भूकंप कोई एक मिनट तक चलता रहा जो बहुत ही भयावह था.”

उन्होंने कहा,“ऐसा लग रहा था जैसे आप ऊंची लहरों के बीच फंसी किसी नौका पर सवार हों. इमारत इधर से उधर डोल रही थी. दरवाज़े थपथपा रहे थे और किताबें अल्मारियों से गिर रही थीं.”

बंदुंग में एक प्रत्यक्षदर्शी ने पत्रकारों को बताया,“हम सभी बैठे पढ़ रहे थे कि इमारत हिलने लगी और कुछ मिनट तक हिलती रही और फिर छत नीचे आ गिरी.”

शहर के सैकड़ों लोगों ने भूकंप के और झटकों के डर से सैनिक अड्डे में जाकर शरण ली.

भूकंप का झटका 500 किलोमीटर दूर बाली द्वीप के सुराबाया शहर तक महसूस किया गया जो इंडोनेशिया का दूसरा सबसे बड़े शहर है.

भूकंप के आते ही सुनामी की चेतावनी जारी की गई लेकिन फिर उसे वापस ले लिया गया.

दिसम्बर 2004 में सुमात्रा द्वीप के तट के परे आए ज़बरदस्त भूकंप से सुनामी शुरु हुई थी जिससे दक्षिण पूर्वी एशिया में दो लाख लोग मारे गए थे.

इंडोनेशिया प्रशान्त महासागर के उस क्षेत्र में है जहां सबसे अधिक भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी फूटते हैं.

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